Budget 2026 Expectations for Electronics Industry: देश की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की अगले वित्त वर्ष 2027 के बजट से काफी उम्मीदे हैं। इंडस्ट्री ने सरकार से टैरिफ में मौजूद खामियों को दूर करने और नियामकीय दिक्कतों को कम करने की मांग की है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री का कहना है कि टैरिफ से जुड़ी खामियों के चलते लागत बढ़ रही हैं और भारत के वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनने का रास्ता तय करना कठिन हो रहा है। इंडस्ट्री बॉडी ने ऐसे सुझाव दिए हैं जिसे लेकर इसका कहना है कि लागत से जुड़ी खामियां कम होंगी, कारोबार करने में आसानी होगी और वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों के बीच भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी। ICEA के सदस्य एपल , फॉक्सकान, शाओमी, ओप्पो, वीवो, डिक्सन और जबील जैसी दिग्गज कंपनियां हैं।
Budget 2026 Expectations for Electronics Industry: क्या हैं उम्मीदें
प्री-बजट रिपोर्ट में ICEA (इंडियन सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन) ने मोबाइल फोन कंपोनेंट्स, वेयरेबल्स, डिस्प्ले असेंबलीज और कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में बदलाव की मांग की है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग एंड अदर ऑपरेशंस इन वेयरहाउस रेगुलेशंस (MOOWR) योजना में सुधार का भी प्रस्ताव रखा है। सबसे तेजी से बढ़ रहे सेगमेंट्स में शुमार वेयरेबल्स और हियरेबल्स को लेकर ICEA ने प्रस्ताव रखा है कि फिनिश्ड प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी को 20% से घटाकर 15% किया जाए ताकि यह देश के टैरिफ रोडमैप के मुताबिक हो सके। साथ ही वेयरेबल्स में इस्तेमाल होने वाले मैकेनिकल पार्ट्स पर ड्यूटी को 15% से घटाकर 10% करने की भी मांग की गई है, ताकि इन्हें मोबाइल फोन कंपोनेंट्स के बराबर लाया जा सके।
इंडस्ट्री की एक अहम चिंता ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइसेज़ और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाली डिस्प्ले असेंबली पर इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को लेकर है। अभी फिनिश्ड डिस्प्ले और उनके अहम इनपुट्स, दोनों पर 15% ड्यूटी लगती है जिससे घरेलू वैल्यू एडिशन के लिए बहुत कम इंसेंटिव मिलता है। ICEA ने सुझाव दिया है कि फिनिश्ड यानी कि तैयार हो चुके असेंबलीज पर 15% ड्यूटी बनाए रखा जाए, जबकि इनपुट्स और सब-पार्ट्स पर ड्यूटी शून्य किया जाए, जैसे कि मोबाइल फोन और टेलीविजन के फ्रेमवर्क में है।
इंडस्ट्री ने स्मार्टफोन में वायरलेस चार्जिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल जैसे एडवांस्ड कंपोनेंट्स में भी खामियों की तरफ इशारा किया है, जहां इनपुट्स पर फिनिश्ड मॉड्यूल की तुलना में अधिक ड्यूटी लगती है। ICEA ने घरेलू मार्केट में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए पार्ट्स पर शुल्क समाप्त करने और फिनिश्ड प्रोडक्ट्स पर मौजूदा 10% शुल्क बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है।
कैपिटल गुड्स को लेकर भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। एक तरफ मोबाइल फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाली पूरी तरह तैयार मशीनरी पर अक्सर जीरो ड्यूटी लगती है तो ऐसी मशीनें भारत में ही बनाने के लिए जरूरी कंपोनेंट्स पर 20% तक टैरिफ लगाया जाता है। ICEA ने घरेलू मार्केट में प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार से कैपिटल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले सभी कंपोनेंट्स और सब-असेंबली पर ड्यूटी जीरो करने की सिफारिश की है।
टैरिफ के अलावा एसोसिएशन ने विवादों को कम करने के लिए किसी भी प्रकार से इस्तेमाल होने वाली सभी डिस्प्ले असेंबली को एक ही कस्टम कैटेगरी में रखने की सिफारिश की है। इसके साथ ही एसोसिएशन ने इंटरएक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले (IFPD) के लिए अलग टैरिफ लाइन बनाने का भी सुझाव दिया गया है, जोकि अभी सामान्य मॉनिटरों के साथ ही हैं जिससे तकनीकी फर्क पता नहीं चलता है।
ऑपरेशनल मोर्चे पर बात करें तो ICEA ने MOOWR के तहत कैपिटल गुड्स पर डिप्रिसिएशन की मंजूरी देने, वेयरहाउस इकाइयों को भी RoDTEP का फायदा देने, एक्स-बॉन्ड क्लीयरेंस प्रोसीजर्स को आसान बनाने और MOOWR एंटिटीज को डीम्ड AEO टियर-1 स्टेटस देने की सिफारिश की है। इसके अलावा एसोसिएशन ने मोबाइल फोन बनाने की प्रक्रिया के दौरान वेस्टेज को ध्यान में रखते हुए 2% तक के मानक वेस्टेज नॉर्म को औपचारिक मान्यता देने की भी सिफारिश की है।
ICEA ने माइक्रोफोन, रिसीवर और स्पीकर जैसे हैंडसेट सब-असेंबली पर आयात शुल्क को 15% से घटाकर 10% करने की भी मांग की है। इसके अलावा इंडस्ट्री बॉडी ने PCBAs और FPCAs पर ड्यूटी को 10% तक घटाने की सिफारिश की है।