एमएसएमई उन सेक्टर में से एक है, जिन्हें निर्मला सीतारमण के यूनियन बजट से काफी उम्मीदें हैं। इस सेक्टर को सरकार टैक्स में राहत, फंड जुटाने में आसानी के उपायों सहित कई उम्मीदें हैं। यह सेक्टर देश की इकोनॉमी के लिए बहुत अहम हैं। देश में 6 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई हैं। इनमें 11 करोड़ से ज्यादा लोग काम करते हैं। यह देश में काम करने वाले लोगों को कुल संख्या का करीब 40 फीसदी है। जीडीपी में एमएसएमई का करीब 30 फीसदी योगदान है। मैन्युफैक्चरिंग में इस सेक्टर की करीब 45 फीसदी हिस्सेदारी है।
फंड की कमी दूर करने से बढ़ेगी सेक्टर की ग्रोथ
एमएसएमई सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार ने इस सेक्टर की फंड की जरूरतें पूरी करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके बाद भी छोटे उद्यमों को पूंजी जुटाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। वित्तमंत्री एमएसएमई की फंडिंग की दिक्कत दूर करने के लिए यूनियन बजट में ऐलान कर सकती हैं। इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में एमएसएमई सेक्टर के लिए सरकार ने 22,138 करोड़ रुपये का ऐलोकेशन किया था। यह पिछले साल के बजट ऐलोकेशन के बराबर है।
एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन की जरूरत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को 5 लाख करोड़ रुपये की इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को बढ़ाना चाहिए। इससे एमएसएमई को खुद को आधुनिक बनाने के साथ ही कारोबार के विस्तार में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार के कई उपायों के बावजूद इस सेक्टर को प्रोत्साहन की जरूरत है। सरकार ने 2030 तक इस सेक्टर से एक्सपोर्ट को बढ़ाकर 155 अरब डॉलर तक करने का टारगेट तय किया है। अगर यह टारगेट हासिल करना है तो इसके लिए सरकार को एमएसएम सेक्टर की मदद करनी पड़ेगी।
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विदेशी में प्रोडक्ट्स को प्रतिस्पर्धी बनाने के उपाय करने होंगे
सरकार एमएसएमई सेक्टर से एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए 5,000 रुपये का एक डेडिकेटेड फंड बना सकती है। इसका इस्तेमाल एक्सपोर्ट के रास्ते में एमएसएमई को आने वाली बाधाएं दूर करने के लिए किया जा सकता है। इससे एमएसएमई के प्रोडक्टस को विदेशी बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद मिलेगी। अभी इंडियन एमएसएमई को कई देशों के प्रोडक्ट्स का मुकाबला विदेशी बाजार में करना पड़ता है। कई देश अपने यहां एमएसएमई को काफी प्रोत्साहन देते हैं।