Budget 2022 : कोविड की तीसरी लहर के चलते राहत की जरूरत को देखते हुए, इस बजट (Union Budget) में पिछले साल ज्यादा खर्च और राज्यों के साथ नजदीकी जुड़ाव के जरिए ग्रोथ को सपोर्ट देने के लिए घोषित सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान को और मजबूती मिलने की संभावना है।
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने बताया कि कैपिटल बजट के लिए ज्यादा आवंटन के अलावा केंद्र और राज्यों के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा कैपेक्स में तालमेल से योजना को मजबूती दी जा सकती है।
राज्यों के लिए स्पेशल फाइनेंसिंग विंडो की हो सकती है व्यवस्था
राज्यों को उनके कैपेक्स में सपोर्ट देने के लिए एक स्पेशल फाइनेंसिंग विंडो की पेशकश की जा सकती है। एक अधिकारी ने कहा, ऑप्शंस में एक ब्याज मुक्त, 50 साल का लोन प्रोग्राम या कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़ी अतिरिक्त बोरोइंग शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि इन प्रपोजल्स पर अंतिम फैसला बजट के आसपास लिया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाकर 5.54 लाख करोड़ रुपये कर दिया था, जो एफवाई 21 के 4.39 लाख करोड़ रुपये के रिवाइज एस्टीमेट से 26 फीसदी ज्यादा था। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इसमें 20-25 फीसदी बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
‘कैपेक्स को प्राथमिकता देना अहम’
प्राइवेट कैपेक्स के अभाव में, सरकारी कैपिटल स्पेंडिंग से इकोनॉमी को सपोर्ट मिल रहा है। पिछले हफ्ते जारी पहले एडवांस एस्टीमेट के मुताबिक, ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) में 9.2 फीसदी की बढ़ोतरी की तुलना में वित्त वर्ष 22 में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल का निर्माण 15 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स ने भी सुस्त फिस्कल कंसॉलिडेशन के जरिए कैपेक्स को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
फिस्कल डेफिसिट में हो सीमित कमी
ईवाई इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्तव ने कहा, 1 फरवरी को घोषित होने बजट में वित्त वर्ष 22 के 6.8 फीसदी की तुलना में फिस्कल डेफिसिट में सीमित कमी करते हुए वित्त वर्ष 23 के लिए 6 फीसदी का लक्ष्य रहना चाहिए। ज्यादातर फंड को कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ावा देने के लिए मुक्त रखना चाहिए।