राज्यों को उनके कैपेक्स में सपोर्ट देने के लिए एक स्पेशल फाइनेंसिंग विंडो की पेशकश की जा सकती है। एक अधिकारी ने कहा, ऑप्शंस में एक ब्याज मुक्त, 50 साल का लोन प्रोग्राम या कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़ी अतिरिक्त बोरोइंग शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि इन प्रपोजल्स पर अंतिम फैसला बजट के आसपास लिया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाकर 5.54 लाख करोड़ रुपये कर दिया था, जो एफवाई 21 के 4.39 लाख करोड़ रुपये के रिवाइज एस्टीमेट से 26 फीसदी ज्यादा था। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इसमें 20-25 फीसदी बढ़ोतरी होने का अनुमान है।