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Budget 2022 : पेमेंट इंडस्ट्री की डिमांड, जीरो MDR व्यवस्था खत्म करे या इंसेंटिव दे सरकार

इंडस्ट्री को यूपीआई और रूपे एमडीआर जीरो होने से 5,500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है, इस फैसले से सरकार ने इन पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स की निवेश करने और फाइनेंसियल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की क्षमता को छीन लिया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 21, 2022 पर 6:48 PM
Budget 2022 : पेमेंट इंडस्ट्री की डिमांड, जीरो MDR व्यवस्था खत्म करे या इंसेंटिव दे सरकार
सरकार ने जनवरी, 2020 से यूपीआई और रूपे ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) खत्म कर दिया था

Budget 2022 :  डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री ने केंद्र सरकार से आगामी आम बजट (Union Budget) में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और रूपे डेबिट कार्ड्स (Rupay debit cards) के लिए जीरो एमडीआर व्यवस्था को वापस लेने का अनुरोध किया है। पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सरकार ने जनवरी, 2020 से यूपीआई और रूपे ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) खत्म कर दिया था।

डिजिटल पेमेंट पर लगने वाला शुल्क है एमडीआर

प्वाइंट ऑफ सेल टर्मिनल (point-of-sale terminal) से किसी डिजिटल ट्रांजैक्शन के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाने वाला एमडीआर मर्चैंट द्वारा एक बैंक, कार्ड नेटवर्क और ऑफलाइन ट्रांजैक्शन के लिए पीओएस प्रोवाइडर और ऑनलाइन खरीद के लिए पेमेंट गेटवे को भुगतान किया जाता है। यहां पर मर्चैंट का मतलब दुकानों से हैं, जहां एक कस्टमर गुड्स का भुगतान करने के लिए एक कार्ड स्वाइप कराता है और कार्ड नेटवर्क वीजा, मास्टरकार्ड और रूपे जैसी कंपनियां हैं।

इंडस्ट्री को बने रहने में मिलेगी मदद

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