Budget 2022 : महामारी के चलते पिछले दो साल में देश के स्टार्टअप्स ने अप्रत्याशित रूप से चुनौतियों का सामना किया है। ज्यादातर का फंड खत्म हो गया, कई एंटरप्रेन्योर्स को कई टैक्स की मार से जूझना पड़ा और कुछ को अपना ऑपरेशन बंद करना पड़ गया। अब सभी की नजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं, जो 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। स्टार्टअप आम बजट 2022-23 (Union Budget 2022-23) से क्या उम्मीद कर रहे हैं, आइए इस पर नजर डालते हैं...
जितेंद्र चोकसे, फाउंडर और सीईओ, फिटर (Fittr)
स्टार्टअप्स में निवेश अहम है, क्योंकि वे जॉब क्रिएशन के इंजन हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार घरेलू स्तर पर कैपिटल पार्टिसिपेशन के लिए नीतियां लाएगी और जरूरी सपोर्ट मैकेनिज्म पेश करेगी। स्टार्टअप इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर के साथ फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट में टैक्स छूट की जरूरत है, जिससे भारतीय स्टार्टअप्स के ग्लोबलाइजेशन के लिए दरवाजे खुलेंगे।
रोहित गजभिये, फाउंडर और सीईओ, फाइनेंसपीयर
Financepeer : रिकॉर्ड निवेश के साथ वर्ष 2021 फिनटेक सेक्टर के लिए शानदार रहा है, जिसका प्रदर्शन महामारी के दौर में भी दूसरे सेक्टर्स से अच्छा रहा है। बजट 2022 में अनुकूल नीतियों और बंदिशों में कमी के साथ फिनटेक इंडस्ट्री की ग्रोथ और सफलता को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। डाटा प्रोटेक्शन मैकेनिज्म के बगैर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी पूरी नहीं होगी। आम बजट में डाटा सिक्योरिटी के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्च के विकास पर जोर दिया जाना चाहिए। इंसेंटिव और इनवेस्टमेंट के जरिए एनबीएफसी को मजबूती मिले। फिनटेक सेक्टर्स में नए सुधार लाए जाने चाहिए।
जतिन परांजपे, फाउंडर, खेलोमोर
KheloMore : पहुंच आसान होने से भारत में खेलों को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में स्पोर्ट्स कोचिंग, स्पोर्ट्स वेन्यूज की बुकिंग और खेल इक्विपमेंट की खरीद पर 18 फीसदी का जीएसटी एक बड़ी बाधा है। सरकार को इसे घटाकर 5 से 10 फीसदी के बीच करना चाहिए।
राहुल सिंह, को-फाउंडर मेश
Mesh : हम इस बजट के इनोवेशन और ग्रोथ को बढ़ावा देने वाला होने की उम्मीद करते हैं। बजट में कंप्लायंसेज आसान किए जा सकते हैं, टैक्स इंसेंटिव के साथ टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाया जा सकता है, जिससे निवेश के अनुकूल माहौल बनेगा।
विजयराघवन वेणुगोपाल, सीईओ और को-फाउंडर, फास्टएंडअप
बीते साल के आम बजट में सरकार द्वारा जारी फंड से पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के जरिये हेल्थकेयर सेक्टर के लिए 2.23 लाख करोड़ रुपये के आवंटन के साथ स्पेंडिंग 137 फीसदी तक बढ़ गई। इस साल भी सेक्टर पर स्पेंडिंग बढ़ने का अनुमान है, क्योंकि इससे पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। हम घरेलू हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स और कंपनियों पर जीएसटी घटने की उम्मीद करते हैं, जिसमें इम्युनिटी बूस्टिंग प्रोडक्ट्स पर जीएसटी में कमी शामिल है।