Budget 2022 : इस साल 1 फरवरी को पेश होने वाला आम बजट दो फैक्टर्स से प्रभावित होने का अनुमान है। पहला, उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने वाला चुनाव है, उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट में इसका ध्यान रखा होगा। नॉर्थ ब्लॉक के अधिकारी वित्त वर्ष 2022-23 के लिए एक वादों और सब्सिडी से भरा लोकप्रिय बजट ला सकते हैं। यूपी के अलावा पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी चुनाव होने जा रहे हैं। सभी राज्यों में काउंटिंग 10 मार्च को होगी।
दूसरा फैक्टर कोविड-19 की तीसरी वेव होगी, जिसका बजट में खास ध्यान रखा जाएगा। तीसरी वेव की शुरुआत दिसंबर से हो गई है। हालांकि, इस वेव का साइज और तीव्रता का आकलन बजट अनुमान को बदल सकती है, इसलिए अच्छे बजट के लिए सटकी भविष्यवाणी अहम होगी।
सीमित रह सकता है तीसरी लहर का असर
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि ओमीक्रोन की वेव तेजी से बढ़ रही है और तेजी से गिरावट से इसका जनवरी और फरवरी में आर्थिक असर सीमित रह सकता है। वह कहते हैं, “इस बार बाधाएं काफी कम हैं। इसलिए मेरा आकलन है कि 2021-22 के लिए जीडीपी ग्रोथ 9-9.2 फीसदी रहेगी, जो उम्मीद से थोड़ी कम है।”
रूरल सेक्टर पर रह सकता है जोर
अधिकारियों और इकोनॉमिस्ट्स के मुताबिक, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का उत्तर प्रदेश में काफी कुछ दांव पर लगा है, जो मुख्य रूप से रूरल स्टेट है और इसे 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इसीलिए डॉक्यूमेंट रूरल सेक्टर पर ज्यादा जोर रह सकता है।
चुनावी राज्य का सीधा उल्लेख नहीं
इकोनॉमिस्ट और पूर्व चीफ स्टैटिस्टीशियन ऑफ इंडिया प्रणब सेन कहते हैं, “मुझे बजट में बड़ी संख्या में वादे शामिल होने की उम्मीद है।” डॉक्युमेंट में किसी चुनावी राज्य का सीधा उल्लेख करने से सरकार के बचने की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा, “यूपी के लिए भाजपा का नारा ‘डबल इंजन’ है। इसका मतलब है कि बजट में केंद्रीय स्तर पर कुछ राष्ट्रीय योजनाओं के साथ कुछ कोशिश की जाएगी, जिससे यूपी जैसे राज्यों को फायदा मिलेगा।”
डिमांड क्रिएशन पर होगा जोर
डेलॉय इंडिया से जुड़ी एक इकोनॉमिस्ट रुमकी मजूमदार कहती हैं, “डिमांड क्रिएशन की जरूरत को देखते हुए सरकार रोजगार सृजन और वर्कफोर्स को कुशल बनाने पर ध्यान दे सकती है।” उन्होंने बजट ग्रोथ को बढ़ावा देने और स्टैबिलिटी बनाए रखने की कोशिश होने की उम्मीद जताई है।
बजट में अप्रत्यक्ष रूप से चुनावी राज्यों को मिल सकती है सौगात
अब, मान लिया जाए कि सीतारमण ग्रामीण युवाओं के लिए एक जॉब स्कीम की घोषणा करें या पहले से चल रही योजनाओं के लिए सब्सिडी बढ़ाएं, तो वह आचार संहिता के कारण इसका ज्यादा ब्योरा नहीं देंगी। इससे यूपी और उत्तराखंड के युवाओं को फायदा होगा। इससे सिर्फ संदेश शामिल होगा और कैंपेन मैनेजर इससे जुड़े नारे को आगे बढ़ाएंगे।