Budget 2022 : नाइट फ्रैंक का डिमांड बढ़ाने के लिए डेवलपर्स-बायर्स दोनों को टैक्स छूट देने का सुझाव

नाइट फ्रैंक ने कहा, रियल एस्टेट सेक्टर में रिकवरी को बनाए रखने के लिए सरकारी समर्थन की जरूरत होगी

अपडेटेड Jan 17, 2022 पर 5:36 PM
प्रॉपर्टी कंसल्टैंसी फर्म नाइट फ्रैंक ने रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सरकार को दिए कई सुझाव

Budget 2022 : नाइट फ्रैंक इंडिया के मुताबिक, रियल एस्टेट सेक्टर को आगामी बजट से सप्लाई और डिमांड दोनों साइड से टैक्स इंसेंटिव्स (Tax incentives) की जरूरत है। प्रॉपर्टी कंसल्टैंसी फर्म ने कहा कि इस सेक्टर को भले ही महामारी की पहली और दूसरी लहरों के दौरान झटका लगा है, लेकिन होमओनरशिप की भावना में सुधार और कुछ राज्य सरकारों द्वारा इंसेंटिव्स दिए जाने से डिमांड बढ़ रही है। नाइट फ्रैंक ने एक बयान में कहा कि रिकवरी को बनाए रखने के लिए सरकारी समर्थन की जरूरत होगी। बजट 2022-23 के लिए उसकी सिफारिशें इस प्रकार हैं :

इनपुट टैक्स क्रेडिट को मंजूरी मिले

उसकी मांग है कि डेवलपर पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) की अनुमति दें। उसने कहा कि सीमेंट पर 28 फीसदी और स्टील पर 18 फीसदी जीएसटी है, साथ ही टैक्स के चलते कमोडिटी कीमतें खासी बढ़ गई हैं। चूंकि डेवलपर्स आईटीसी क्लेम नहीं कर सकते हैं, इसलिए इन टैक्स के चलते कंस्ट्रक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है। साथ ही होम बायर्स के लिए कीमतें बढ़ती हैं और डिमांड कमजोर होती है।


रिटेल-हॉस्पिटैलिटी बिजनेस से हुए नुकसान के कैरी फॉरवर्ड की अनुमति मिले

ट्रैवल प्रतिबंध और सोशल डिस्टैंसिंग नॉर्म्स के चलते ये सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। जब प्रतिबंध और लॉकडाउन हटाए गए थे, तो इन बिजनेसेस को फिर से प्रतिष्ठानों को तैयार करने के लिए निवेश करना पड़ा था। अब फिर बंदी की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

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अफोर्डेबिल हाउसिंग के लिए टैक्स हॉलिडे

नाइट फ्रैंक की मांग है कि अफोर्डेबिल हाउसिंग के लिए टैक्स हॉलिडे को 12 महीनों के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। इन प्रोजेक्ट्स पर होने वाले प्रॉफिट को 100 फीसदी टैक्स छूट दी गई है। महामारी से जुड़े प्रतिबंधों के चलते इन प्रोजेक्ट्सके रजिस्ट्रेशन में देरी हुई है, इसलिए वे इस टैक्स रिलीफ का लाभ नहीं ले सकते।

हाउसिंग लोन के प्रिंसिपल पेमेंट पर विशेष टैक्स डिडक्शन

वर्तमान में पीपीएफ, इक्विटी लिंक्डी सेविंग स्कीम, यूलिप, एनएससी हाउसिंग लोन के प्रिंसिपल पेमेंट सहित विभिन्न इनवेस्टमेंट पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शन लिया जा सकता है। लेकिन इनवेस्टर्स को लुभाने के लिए प्रिंसिपल रिपेमेंट पर 1,50,000 रुपये के अलग सालाना डिडक्शन की पेशकश की जानी चाहिए।

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होम लोम डिडक्शन की लिमिट बढ़े

हाउसिंग को ज्यादा अफोर्डेबिल बनाने और डिमांड बढ़ाने के लिए, सेक्शन 24 के तहत हाउसिंग लोन इंटरेस्ट के लिए डिडक्शन को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।

 

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