लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां (Life Insurance Companies) जीवन बीमा प्रीमियम (Life Insurance Premium) पर अलग से टैक्स छूट (tax rebate) चाहती हैं। अभी इनकम टैक्स (Income Tax) के सेक्शन 80सी के तहत लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट मिलती है। 80सी के तहत म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट, ट्यूशन फीस, होम लोन, पीपीएफ सहित कई दूसरे खर्चों पर भी टैक्स छूट मिलती है। इसके चलते लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए टैक्स छूट की ज्यादा गुंजाइश नहीं बचती है।
जीवन बीमा कंपनियों का मानना है कि लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर अलग से टैक्स छूट मिलने से इंश्योरेंस (Insurance) कराने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। उन्होंने इस बारे में वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) से सिफारिश की है। अभी कोई व्यक्ति 80सी के तहत आने वाले किसी भी निवेश माध्यम में सालाना 1,50,000 लाख रुपये इन्वेस्ट कर टैक्स छूट हासिल कर सकता है। जीवन बीमा प्रीमियम के लिए अलग से कोई सीमा तय नहीं है।
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एजीस फेडरल लाइफ इंश्योरेंस के सीएमओ एवं प्रोडक्ट्स हेड कार्तिक रमन का कहना है कि अभी टैक्स रिबेट के लिए इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत 1,50,000 रुपये की लिमिट में कई चीजें आती हैं। इससे लाइफ इंश्योरेंस के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं बचती है। उन्होंने कहा, "हम लाइफ इंश्योरेंस के लिए सेपरेट बकेट चाहते हैं।"
जीवन बीमा कंपनियां एनुइटी (Annuity) पर भी टैक्स छूट चाहती हैं। अभी हाथ में आने वाली एनुइटी की रकम पर टैक्स लगता है। चूंकि इसे सैलरी की तरह माना जाता है, जिससे इस पर टैक्स लगता है। लेकिन, सच्चाई यह है कि इसे इनकम का रेगुलर सोर्स नहीं माना जा सकता। रिटायर हो चुके लोगों के लिए यह इनकम का एल्टरनेट सोर्स है। इसे टैक्स के दायरे से बाहर रखने पर रिटायर लोगों को बहुत फायदा होगा।
रमन ने कहा, "कॉस्ट ऑफ लिविंग बढ़ रही है। इसिलए एनुइटी पर टैक्स सही नहीं लगता। हमने सरकार से इसे सेक्शन 10(10डी) कहत लाने की सिफारिश की है। सेक्शन 10(10डी) के तहत बोनस सहित लाइफ इंश्योरेंस बेनेफिट को टैक्स से छूट मिलती है।" उन्होंने कहा कि सरकार अगर हमारी दोनों मांग मान ले तो हमें बहुत खुशी होगी।