BUDGET 2022: स्थानीय निकायों के डिसिजन मेकिंग प्रोसेस में टैक्सपेयर को भी हिस्सेदार बनाने की जरूरत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम लोगों को राहत देने के लिए टैक्स के मामले में भी रियायतों का ऐलान कर सकती है। अगर वह स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाती हैं तो इससे नोकरीपेशा वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी

अपडेटेड Jan 21, 2022 पर 10:48 AM
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। यह उनका चौथा बजट होगा।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ऐसे वक्त बजट पेश करने जा रही है, जब कोरोना की तीसरी लहर चरम पर है। इसका असर आर्थिक गतिविधियों (Economic Activities) पर पड़ा है। हालांकि, दूसरी लहर के मुकाबले यह कम जानलेवा है। वित्तमंत्री को 1 फरवरी को बजट (Union Budget 2022) में कोरोना की चुनौतियों का ध्यान रखना होगा। उम्मीद है कि वह हेल्थ के लिए आवंटन में खासा वृद्धि करेंगी। साथ ही कोरोना से निपटने के लिए अलग से बड़ी राशि का आवंटन करेंगी।

जानकारों का मानना है कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। फिर भी इकोनॉमी में रिकवरी के मजबूत संकेत दिख रहे हैं। टैक्स कलेक्शन (Tax Collection) में अच्छी वृद्धि इसका सबूत है। उधर, रोजगार (Employment) के मोर्चे पर भी हालात में सुधार आया है। इसका काफी श्रेय कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन अभियान को जाता है। आबादी के बड़े हिस्से को टीका लगाने के बद सरकार ने इस महीने की शुरुआत में 15 से 18 साल के बच्चों के लिए भी टीकाकरण शुरू कर दिया है। इससे कोरोनो को लेकर डर कम हुआ है और लोगों का भरोसा बढ़ा है। यह आर्थिक रिकवरी की प्रकिया जारी रहने के लिए बहुत जरूरी है।

सरकार को इकोनॉमिक रिकवरी को ध्यान में रखते हुए इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के उपायों पर फोकस बनाए रखना होगा। सरकार ने कई सेक्टर के लिए पीएलआई स्कीम (PLI Scheme) का ऐलान किया है। इससे देश में निवेश की रफ्तार बढ़ती दिख रही है। उधर, 'मेक इन इंडिया' (Make In India) पर फोकस से भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट में इन्वेस्टमेंट बढ़ाने वाले कुछ नए उपायों का ऐलान कर सकती हैं।


इनकम टैक्स के मामले में आम लोगों को राहत देने की जरूरत है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) बढ़ाकर कम से कम 75,000 रुपये कर सकती हैं। इसके अलाना इंडिविजुअल इनकम टैक्स की उच्चतम दर में भी थोड़ी कमी करने की जरूरत है। सरचार्ज और सेस मिलाकर यह 42 फीसदी से ऊपर पहुंच जाता है। अगर वित्त मंत्री इसमें कमी करती हैं तो इससे ज्यादा इनकम वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

सरकार को टैक्सपेयर्स को डिसिजन मेकिंग प्रोसेस यानी फैसले लेने की प्रकिया में हिस्सेदार बनाने की भी जरूरत है। सरकार के कुल खर्च में टैक्सपेयर्स के पैसे की बड़ी हिस्सेदारी है। इसलिए कम से कम स्थानीय निकायों के स्तर पर होने वाले फैसलों में टैक्सपेयर्स को शामिल करना जरूरी है। इससे टैक्सपेयर्स का भरोसा सरकार में बढ़ेगा। साथ ही वह अपनी जिम्मेदारियों को लेकर भी गंभीर होगा।

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