Budget 2024-25 : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 2025 में इंडियन इकोनॉमी के लिए 5 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर का टारगेट तय किया है। पिछले साल नवंबर में एक कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि 2025 तक इंडियन इकोनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। इसके लिए इकोनॉमी की तेज ग्रोथ जरूरी है। सरकार जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सरकार ने इसके लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाया है। प्राइवेट सेक्टर को भी पूंजीगत खर्च बढ़ाने की सलाह दी गई है। सरकार ने PLI जैसी कई स्कीमों का ऐलान किया है। सरकार का मानना है कि PLI स्कीम से निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अच्छे नतीजे दिखे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन उपायों के साथ ही सरकार को एजुकेशन पर निवेश बढ़ाने की जरूरत है। यूनियन बजट में एजुकेशन का बजट बढ़ाना होगा। अभी एजुकेशन पर सरकार का खर्च जीडीपी का सिर्फ 2.9 फीसदी है।
बजट 2023 में एजुकेशन बजट 8 फीसदी बढ़ा था
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट में एजुकेशन सेक्टर के लिए 1.12 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था। इसमें सेकेंडरी एजुकेशन, हायर एजुकेशन के साथ ही एजुकेशन से जुड़ी स्कीमों का आवंटन शामिल था। यह आवंटन एक साल पहले के मुकाबले करीब 8 फीसदी ज्यादा था। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, 2020 (NEP) में कहा गया है कि एजुकेशन पर जीडीपी का कम से कम 6 फीसदी खर्च होना चाहिए। इस हिसाब से अभी एजुकेशन पर सरकार का खर्च बहुत कम है। यूनियन बजट 2023 में स्कूल एजुकेशन का बजट 8 फीसदी बढ़ाया गया था।
शिक्षित युवा के लिए स्वरोजगार के मौके
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एजुकेशन सेक्टर पर आवंटन बढ़ाने से 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का लक्ष्य जल्द हासिल करने में मिलेगी। सरकार को स्कूली शिक्षा पर खर्च बढ़ाने के साथ ही उसकी क्वालिटी बेहतर बनाने की जरूरत है। इससे युवाओं को रोजगार लायक बनाने में मदद मिलेगी। इससे युवा स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे। एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि एजुकेशन के लिए आनंटन बढ़ाने से इंडिया को 'नॉलेज आधारित इकोनॉमी' में बदलने में मदद मिलेगी। इसके लिए देश के दूरदराज के इलाकों में स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने पर फोकस करना होगा। अभी खासकर ग्रामीण इलाकों में स्कूलों से जुड़ी ढांचागत सुविधाएं अच्छी नहीं हैं। साथ ही शिक्षा की क्वालिटी भी खराब है।
अभी इकोनॉमी 3.63 लाख करोड़ डॉलर की
शिक्षित युवा को स्वरोजगार के मौके मिलने से इकोनॉमी की रफ्तार बढ़ेगी। यूनियन बजट 2023 में इंडिया की नॉमिनल जीडीपी के 301.75 लाख करोड़ पहुंच जाने का अनुमान जताया गया था। कहा गया था कि वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी 272.41 लाख करोड़ थी। 10.5 फीसदी ग्रोथ के साथ इसके वित्त वर्ष 2023-24 में 301 लाख करोड़ पहुंच जाने का अनुमान जताया गया था। अमेरिकी डॉलर में यह 3.63 लाख करोड़ के बराबर है। उधर, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने कहा था कि इंडियन इकोनॉमी वित्त वर्ष 2022-23 में 3.5 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 5 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो जाएगी।