इस बार के बजट में रियल स्टेट सेक्टर होम लोन ब्याज पर भुगतान के लिए दी जानी वाली टैक्स छूट को आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद कर रहा है। बजट 2023 में होम लोन पर दी जानी वाली टैक्स छूट को लेकर रियल स्टेट सेक्टर की निगाहें वित्त मंत्री की घोषणाओं पर लगी हुई हैं। बजट 2023 में रियल स्टेट सेक्टर होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट को बढ़ाए जाने की मांग कर रहा है। रियल स्टेट सेक्टर की मांग है कि होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक किए जाने की जरूरत है। इससे किफायती घर खरीदने वाले लोगों की तादाद में इजाफा होगा। घर खरीदने वालों के साथ ही साथ रियल स्टेट में निवेश करने वालों को भी मिलने वाली टैक्स में छूट को आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है। सरकार को होम लोन पर ब्याज भुगतान के लिए कटौती की मौजूदा सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक करना चाहिए।
Budget 2023 Live Updates: 31 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) सरकार ने पेश कर दिया। सर्वे से हमें इस फिस्कल ईयर और अगले फिस्कल ईयर में देश की आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगता है। अब देखना ये है कि 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अपना पिटारा खोलती हैं तो उससे मिडिल क्लास को खुशी मिलती है या गम। 2014 के बाद से इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं हुआ
Budget 2023 Live Updates: 31 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) सरकार ने पेश कर दिया। सर्वे से हमें इस फिस्कल ईयर और अगले फिस्कल ईयर में देश की आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगता है। अब देखना ये है कि 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अपना पिटारा खोलती हैं तो उससे मिडिल क्लास को खुशी मिलती है या गम। 2014 के बाद से इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं हुआ है। इसके साथ ही पीएम किसान को सम्मान निधि का पैसा बढ़ने की उम्मीद है। वहीं दूसरी तरफ सरकार का फोकस फिस्कल डेफिसिट कम करने पर होगा। ऐसे में अब देखना होगा कि निर्मला सीतारमण कैसे बैलेंस बनाती हैं।
आम बजट (Union Budget) से पहले वित्त वर्ष 2022-23 के लिए देश का आर्थिक सर्वे (Economic Survey 2023) पेश हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने संसद में आर्थिक सर्वे पेश किया, जिसके बाद मुख्य आर्खिक सलाहकार (CEA) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) ने देश की पूरी आर्थिक स्थिति की इस रिपोर्ट को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि भारत को अब अर्थव्यवस्था में सुस्ती की चिंता करने की जरूरत नहीं हैं। नागेश्वरन ने कहा कि IMF ने FY23 में इकोनॉमिक ग्रोथ 6.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। अगले फाइनेंशियल ईयर में इसके 6.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। FY25 में ग्रोथ 6.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। हमारे इकोनॉमिक सर्वे में भी इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर इसी तरह के अनुमान जताए गए हैं।
देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) मंगलवार को संसद (Parliament) के दोनों सदनों को संबोधित किया। राष्ट्रपति के संबोधन के साथ ही संसद के बजट सत्र (Budget Session) का आगाज हो गया है। राष्ट्रपति ने 'भारत को दुनिया की फार्मेसी' बताते हुए कहा, आज़ादी के अमृतकाल में देश पंच प्राणों की प्रेरणा से आगे बढ़ रहा है। गुलामी के हर निशान, हर मानसिकता से मुक्ति दिलाने के लिए भी मेरी सरकार निरंतर प्रयासरत है। जो कभी राजपथ था, वह अब कर्तव्यपथ बन चुका है।
इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बजट सत्र शुरू होने से पहले देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अनिश्चित ग्लोबल आर्थिक स्थिति के बीच इंडिया का बजट आम नागरिकों की उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश करेगा। मेरा मानना है कि निर्मला सीतारमण उन सभी उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश करेंगी। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कहा कि भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए कठोर कदम उठाए गए हैं। इससे टैक्सपेयर्स का आत्मविश्वास बढ़ा है। गरीबों पर खास तौर से ध्यान दिया जा रहा है।
आज 31 जनवरी को ही राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हो जाएगी। इसके बाद इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) पेश किया जाएगा। चालू वित्त वर्ष में देश की इकोनॉमी के लिए केंद्र सरकार की ओर से क्या किया गया है? इस बारे में जानकारी मिलेगी। दरअसल, इकोनॉमिक सर्वे वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) का प्रमुख सालाना दस्तावेज है। इसमें देश के आर्थिक विकास का लेखाजोखा होता है। इसी के जरिए पता चलता है कि पिछले एक साल में देश की अर्थव्यवस्था किस तरह की रही है। सी सर्वे से आकलन लगाया जाता है कि कहां पर नुकसान हुआ और कहां पर फायदा हुआ है।
इस साल अमीर किसानों को सरकार झटका दे सकती है। कुछ एक्सपर्ट्स इस बात की सिफारिश कर रहे हैं कि रईस किसानों पर इनकम टैक्स लगाया जाए. हालांकि खेती-किसानी और राजनीति का गहरा संबंध होने के कारण इस बात की उम्मीद कम है कि सरकार किसानों पर इनकम टैक्स लगाने का कड़ा फैसला लेगी। हालांकि इस बात के आसार जरूर हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस फाइनेंशियल ईयर में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर खर्च घटाकर 2.5 लाख करोड़ रुपए कर सकती है। सरकार इसे अगले फाइनेंशियल ईयर में घटाकर 1.5 लाख करोड़ तक लाना चाहती है। लेकिन, पिछले सालों के रिकॉर्ड को देखने से पता चलता है कि हर साल यह खर्च टारगेट से काफी ज्यादा रहा है।