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Budget 2023: इंडिया को अगर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है तो रिफॉर्म्स पर करना होगा फोकस

Budget 2023: इंडिया को इकोनॉमिक ग्रोथ तेज बनाए रखने के लिए नापतौल कर कदम उठाने होंगे। बजट से पहले चर्चा में इन कदमों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई है। उद्योग चैंबर ASSOCHAM सहित ऐसी दूसरी संस्थाओं का मानना है कि फाइनेंस मिनिस्टर इस बार बजट में कुछ खास उपायों पर फोकस कर सकती हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 12, 2022 पर 1:17 PM
Budget 2023: इंडिया को अगर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है तो रिफॉर्म्स पर करना होगा फोकस
पीएलआई स्कीम की शुरुआत 2021 में हुई थी। शुरुआत में 13 सेक्टर के लिए करीब 2 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, निवेस आकर्षित करने और रोजगार के मौके बनाने में इससे काफी मदद मिली है।

दीपक सूद

Budget 2023: कई विदेशी कंपनियां चाइना-प्लस स्ट्रेटेजी (China-plus Strategy) पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। इंडिया इस मौके का फायदा उठाकर 2030 तक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना चाहता है। इसके लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें गति शक्ति, PLI Scheme, Make in India, कॉर्पोरेट टैक्स में कमी आदि शामिल हैं। सरकार का मकसद विदेशी निवेश को आकर्षित करने और देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। उपर्युक्त उपायों का असर दिखना शुरू हो गया है। उधर, ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि फाइनेंस मिनिस्टर 1 फरवरी, 2023 को ऐसा बजट (Budget 2023) पेश करेंगी जो इंडियन इकोनॉमी की 7 फीसदी ग्रोथ रेट को बनाए रखने में मददगार होगा।

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनेगा इंडिया

इंडिया को चीन से मिल रही चुनौतियां घटी हैं। कोरोना और जियोपॉलिटिक्स की वजह से चीन बेहाल है। कोरोन का दौरान सप्लाई चेन में आई दिक्कतों से बहुराष्ट्रीय कंपनियां यह समझ चुकी हैं कि उनके लिए सप्लाई-चेन रिस्क को डायवर्सिफाय करना जरूरी है। इधर, इंडिया अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन चुका है। एक दशक में यह जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने के रास्ते पर बढ़ रहा है। हालांकि, जियोपॉलिटिकल क्राइसिस, इनफ्लेशन और ग्लोबल स्लोडाउन इंडिया के लिए भी बड़े चैलेंजेज हैं।

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