दीपक सूद

दीपक सूद
Budget 2023: कई विदेशी कंपनियां चाइना-प्लस स्ट्रेटेजी (China-plus Strategy) पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। इंडिया इस मौके का फायदा उठाकर 2030 तक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनना चाहता है। इसके लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें गति शक्ति, PLI Scheme, Make in India, कॉर्पोरेट टैक्स में कमी आदि शामिल हैं। सरकार का मकसद विदेशी निवेश को आकर्षित करने और देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। उपर्युक्त उपायों का असर दिखना शुरू हो गया है। उधर, ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि फाइनेंस मिनिस्टर 1 फरवरी, 2023 को ऐसा बजट (Budget 2023) पेश करेंगी जो इंडियन इकोनॉमी की 7 फीसदी ग्रोथ रेट को बनाए रखने में मददगार होगा।
दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनेगा इंडिया
इंडिया को चीन से मिल रही चुनौतियां घटी हैं। कोरोना और जियोपॉलिटिक्स की वजह से चीन बेहाल है। कोरोन का दौरान सप्लाई चेन में आई दिक्कतों से बहुराष्ट्रीय कंपनियां यह समझ चुकी हैं कि उनके लिए सप्लाई-चेन रिस्क को डायवर्सिफाय करना जरूरी है। इधर, इंडिया अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन चुका है। एक दशक में यह जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने के रास्ते पर बढ़ रहा है। हालांकि, जियोपॉलिटिकल क्राइसिस, इनफ्लेशन और ग्लोबल स्लोडाउन इंडिया के लिए भी बड़े चैलेंजेज हैं।
इसलिए इंडिया को इकोनॉमिक ग्रोथ तेज बनाए रखने के लिए नापतौल कर कदम उठाने होंगे। बजट से पहले चर्चा में इन कदमों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई है। उद्योग चैंबर ASSOCHAM सहित ऐसी दूसरी संस्थाओं का मानना है कि फाइनेंस मिनिस्टर इस बार बजट में कुछ खास उपायों पर फोकस कर सकती हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
PLI स्कीम
पीएलआई स्कीम की शुरुआत 2021 में हुई थी। शुरुआत में 13 सेक्टर के लिए करीब 2 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, निवेस आकर्षित करने और रोजगार के मौके बनाने में इससे काफी मदद मिली है। इसलिए सरकार को इस स्कीम पर फोकस बनाए रखने की जरूरत है।
Ease of doing business
बिजनेस के लिए अनुकूल माहौल पैदा करने जरूरी है। साथ ही प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने के उपाय भी होने चाहिए। इसके लिए एप्रूवल्स, क्लियरेंसेज और लाइसेंसेज आदि के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम शुरू करने की जरूरत है। इससे न सिर्फ विदेशी व्यापार बढ़ेगा बल्कि SMEs को भी दुनियाभर में अपने प्रोडक्ट्स का निर्यात करने में मदद मिलेगी।
Income Tax Rates
ASSOCHAM सहित कई इंडस्ट्री एसोसिएशंस का कहना है कि सैलरीड क्लास के लिए इनकम टैक्स की दरों में कमी की जानी चाहिए। इससे इकोनॉमी में डिमांड बढ़ेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर के लिए टैक्स रिबेट से जुड़े फायदों को बढ़ाकर सालाना 5 लाख रुपये करना चाहिए। यह भी सलाह दी गगई है कि मैन्युफैक्चरिंग में नए निवेश के लिए 15 फीसदी कॉर्पोरेट टैक्स को दूसरे सेक्टर और सर्विसेज के लिए भी लागू किया जाना चाहिए।
पैसे का समय पर पेमेंट
समय पर पेमेंट के लिए ट्रांसपेरेंट, पेपरलेस और एंड-टू-एंड सिस्टम जरूरी है। इससे न सिर्फ सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने में मदद मिलेगी बल्कि इसे काराबोरी निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे देश और विदेश में मेक इन इंडिया की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
क्रेडिट के नियमों में ढील जरूरी
एक्सपोर्टर्स रियायती दरों पर कर्ज चाहते हैं। एमएसएमई अपने मौजूदा लोन की रिस्ट्रक्चरिंग चाहते हैं। उनका कहा है एक साल के मोरेटोरियम के साथ लोन चुकाने के लिए अतिरिक्त दो साल का वक्त उन्हें दिया जाना चाहिए। उनकी यह भी मांग है कि 90 दिन के बजाय 180 दिन के बाद तक लोन नहीं चुकाए जाने पर ही उसे एनपीए की कैटेगरी में शामिल किया जाना चाहिए।
रोजगार बढ़ाने के उपाय जरूरी
रोजगार के मौके पैदा करने के लिए अगले बजट में रिफॉर्म्स पर फोकस होना चाहिए। खासकर सरकार को एग्रीकल्चर और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में रिफॉर्म्स पर ध्यान देने की जरूरत है। इससे फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही रोजगार के मौके पैदा होंगे। एमएसएमई में ट्रैवल और टूरिज्स जैसे नए सेक्टर की भी पहचान की जा सकती है। इससे रोजगार के मौके बढ़ाए जा सकते हैं।
(दीपक सूद एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल हैं।)
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