Budget 2023: अगर आप विदेशी शेयरों या म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश करने की योजना में हैं? विदेशों में क्रिप्टो करेंसी खरीदने या फिर कोई मूल्यवान पेटिंग्स-मूर्ति या प्रॉपर्टी आदि लेने की सोच रहे हैं? तो अधिक खर्च करने के लिए तैयार हो जाइए। दरअसल सरकार ने केंद्रीय बजट 2023-24 में विदेशी ट्रांजैक्शन पर लिब्राइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के जरिए लगने वाले टैक्स कलेक्शन एट सोर्ट (TCS) को बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है। अभी तक यह 5 फीसदी है। यानी सरकार ने टैक्स कलेक्शन एट सोर्ट (TCS) में 15 फीसदी का इजाफा किया है।
हालांकि सरकार ने यहां विदेशों में पढ़ने वाले छात्रों और मेडिकल इलाज के लिए विदेश जाने वालों को राहत दी है और उनके लिए रेमिंट होने वाली राशि को TCS को 5 फीसदी पर ही बनाए रखा है। हालांकि 7 लाख रुपये से अधिक वाले विदेशी निवेश, गिफ्ट या फॉरेन टूर पर 1 जुलाई 2023 से असर दिखेगा।
RSM India के फाउंडर, डॉक्टर सुरेश सुराना ने बताया, "इस फैसले से लिब्राइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत विदेशी में पैसा भेजना तुरंत बढ़ जाएगा क्योंकि बाद में इसमें उन्हें ज्यादा पैसे देने होंगे। लोग शिक्षा और मेडिकल छोड़कर बाकी उद्देश्यों के लिए पैसे भेज सकते हैं।" इन क्षेत्रों के अलावा निवेश के अलावा कई बाकी एरिया भी प्रभावित होंगे।
चार्टेड अकाउंटेंट मेहुल सेठ ने कहा, "विदेशों में किसी भी तरह की चल या अचल संपत्ति, शेयर, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड्स या क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते हैं तो यह 20 फीसदी के TCS में आएगा। इसका मतलब है कि अगर आप 100 रुपये निवेश कर रहा हूं तो अब मुझे इसके लिए 120 रुपये खर्च करने होगे, जो अच्छा खासा उछाल है।"
अभी तक 20 फीसदी TCS सिर्फ उन्हीं हाई-वैल्यू वाले ट्रांजैक्शन पर लगते थे, जिनमें PAN का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता था।
Electrum Financial Services के फाउंडर और एमडी, अनंत रेड्डी का कहना है कि पेटिंग्स और स्टॉक्स जैसे विकल्पों में निवेश पर तो बहुत असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसमें अधिकतर निवेश करने वाले लोग हाई-इनकम वाले होते हैं। उन्होंने कहा, "हालांकि टूरिज्म सेक्टर पर इससे असर पड़ेगा।"
रुपये की गिरती वैल्यू के बीच सरकार को इस कदम से मिल सकती है। रेड्डी ने बताया, "यह ग्लोबल अस्थिरता के बीच विदेशी मुद्रा के मुकाबले गिरावट को रोकने के लिए एक कदम है। TCS दरों में बढ़ोतरी लोगों को रेमिटेंस पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर करेगी।"