बजट 2023 : पूंजीगत खर्च 25% बढ़ाने, PLI स्कीम का विस्तार कर सकती है सरकार, HDFC Sec के उनमेश शर्मा का अनुमान

budget 2023: सरकार की कोशिश पूंजीगत खर्च बढ़ाने और PLI स्कीम का विस्तार करने के साथ ही संतुलित बजट पेश करने की होगी। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के पिछले बजट काफी संतुलित थे। उन्होंने ग्रोथ बढ़ाने के उपायों को साथ ही आम आदमी को राहत देने की कोशिश की थी

अपडेटेड Dec 28, 2022 पर 5:26 PM
शर्मा ने कहा कि कोरोना कमजोर पड़ने से कुछ सेक्टर पर खर्च बढ़ाने का दबाव सरकार पर कम हुआ है। ऐसे में सरकार फूड सब्सिडी, रोजगार गारंटी योजना और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटन बढ़ा सकती है।

बजट 2023: HDFC Securities के उनमेश शर्मा का मानना है कि सरकार को अगले यूनियन बजट (Union Budget) में पूंजीगत खर्च 20-25 फीसदी बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही PLI स्कीम के दायरे में दूसरे सेक्टर को भी लाने की जरूरत है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब सरकार बड़ी पॉलिसी का ऐलान बजट के बाहर भी करती है। यह इकोनॉमी की मैच्योरिटी का संकेत है। दरअसल, टैक्स स्लैब (Income Tax Slab) को काफी हद तक तर्कसंगत बनाया जा चुका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त पेश होने जा रहा है, जब सरकार पर राजकोषीय घटाने और अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने का दबाव है। पिछले हफ्ते इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने कहा था कि सरकार को फिसक्ल डेफिसिट में कमी लाने पर अपना फोकस बढ़ाना चाहिए। लेकिन, कई इकोनॉमिस्ट्स यह मानते हैं कि ग्लोबल इकोनॉमी की मुश्किलों को देखते हुए सरकार को पूंजीगत खर्च जारी रखने की जरूरत है।

ग्रामीण इलाकों पर खर्च बढ़ाने की जरूरत

शर्मा ने कहा कि अगला यूनियन बजट 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। कुछ लोगों का मानना है कि इस वजह से इसमें लोकलुभावन उपाय शामिल हो सकते हैं। लेकिन, हमें ऐसी उम्मीद नहीं दिखती। पहले की तरह यह एक संतुलित बजट होगा। अभी इकोनॉमी में K-आकार की रिकवरी दिख रही है। इसलिए सरकार के लिए ग्रामीण इलाकों में लोगों की इनकम बढ़ाने के उपाय करने की जरूरत है। लॉन्ग टर्म एसेट क्रिएशन के लिए पूंजीगत खर्च पर सरकार का फोकस बने रहने की उम्मीद है।


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पूंजीगत खर्च 25 फीसदी तक बढ़ सकता है

उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह कुछ सेक्टर पर खर्च बढ़ाने का दबाव सरकार पर कम हुआ है। ऐसे में सरकार फूड सब्सिडी, रोजगार गारंटी योजना और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटन बढ़ा सकती है। हमें लगता है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में सरकार पूंजीगत खर्च में 20-25 फीसदी वृद्धि का ऐलान कर सकती है। इस फाइनेंशियल ईयर के लिए सरकार ने 7.5 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का टारगेट रखा है। सरकार अगले बजट में पीएलआई स्कीम के दायरे में कुछ और सेक्टर को शामिल करने का ऐलान करेगी।

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फिस्कल डेफिसिट का टारगेट घटाएगी सरकार

शर्मा का भी कहना है कि सरकार फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 0.5 फीसदी तक घटा सकती है। वह टारगेट को 6 फीसदी से कम रखने की कोशिश करेगी। सरकार का फोकस रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस सेक्टर पर भी बना रहेगा। सरकार ने पिछले कुछ सालों में डिफेंस इक्विपमेंट का उत्पादन देश में ही करने पर जोर दिया है। अनुमान है कि वह इस कदम को आगे बढ़ाने के लिए बजट में कुछ नए ऐलान कर सकती है।

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