Budget Expectations for auto sector : महामारी के बाद ऑटो सेक्टर पर ऐसा ब्रेक लगा कि वह अभी तक उबर नहीं सका है। हाल में डिमांड आउटलुक में सुधार से सेक्टर में कुछ मजबूती देखने को मिल रही है। इसके साथ ही, इलेक्ट्रिक व्हीकल (Electric vehicle) पर सरकार के जोर, स्वीकार्यता और जागरूकता बढ़ने से चुनौतियां बनी हुई हैं। इस बीच इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी से भी कीमतों पर सीधार असर होता दिख रहा है। वहीं अगर बैटरी और अन्य कम्पोनेंट की कीमतों में नरमी आई तो ईवी की डिमांड और बढ़ सकती है। ऐसे में ऑटो सेक्टर यूनियन बजट से कई उम्मीदें लगाए बैठा है।
ईवी की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए लाई गई फेम पॉलिसी (FAME policy) मार्च, 2024 तक वैलिड है। एक एक्सपर्ट के मुताबिक, इसे आगे भी जारी रखने का फायदा मिलेगा। इससे शुरुआती ऊंची कॉस्ट, बैटरी रिप्लेसमेंट कॉस्ट और कम रिसेल वैल्यू जैसी चुनौतियों से पार पाने में मदद मिलेगी। ईवी पर फिलहाल जीएसटी लगभग 5 फीसदी है, लेकिन ईवी कम्पोनेंट्स पर 18 फीसदी या 28 फीसदी है। जीएसटी में कमी से पूरी कॉस्ट में कमी आएगी।
बैटरी पर होने चाहिए ये फैसले
ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में बैटरी रिफर्बिशमेंट, रियूज और बैटरी के रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की जरूरत है। भले ही यह बैटर की कुल लागत को घटाने का दीर्घकालिक समाधान है, लेकिन बैटरी स्वैपिंग (battery swapping) से जुड़ी पॉलिसी को अंतिम रूप दिए जाने की जरूरत है।
वर्तमान में लिथियम ऑयन सेल्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी 5 फीसदी है, जबकि लिथियम ऑयन बैटरी पर इम्पोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी है। इम्पोर्ट ड्यूटी में किसी भी कमी से ईवी की कॉस्ट में कमी आएगी।
इन दिनों सेफ्टी और सुविधा का महत्व बढ़ता जा रहा है। एक एक्सपर्ट के मुताबिक, 10 लाख रुपये कीमत की ओर बाजार का रुख दिख रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि कंज्यूमर ज्यादा भुगतान के लिए राजी दिख रहे हैं। सरकार भी 6 एयरबैग्स को जरूरी बनाकर सही दिशा में कदम बढ़ा रही है। एक्सपर्ट ने कहा कि इन आदेशों के पालन से बढ़ने वाली कॉस्ट के दबाव को दूर करने के लिए एक पीएलआई जैसी स्कीम की जरूरत है। सेफ्टी एयरबैक के विकास और खरीद की लागत से ओईएम की चिंताएं बढ़ जाएंगी। अगर इसका समाधान नहीं होता है तो मिड लेवल सेगमेंट में हर कार की कीमत 35,000 रुपये तक बढ़ जाएगी।
ईवी सेक्टर के लिए अहम होगा यह बजट
उधर, काइनेटिक ग्रीन (Kinetic Green) की फाउंडर और सीईओ सुलाजा फिरोदिया मोटवानी (Sulajja Firodia Motwani) ने कहा कि अभी तक गुजरा साल भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री के लिए खासा अहम रहा, क्योंकि इस दौरान थ्री-व्हीलर सेगमेंट के ईवी व्हीकल्स ने पारम्परिक फ्यूल से चलने वाली सेगमेंट की गाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पिछला यूनियन बजट ईवी इंडस्ट्री के लिए पॉजिटिव था, वैसे ही यह बजट सेक्टर के लिए अहम रहने का अनुमान है। मोटवानी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “ईवी की बिक्री में खासी बढ़ोतरी हुई है। इंडस्ट्री ने थ्री व्हीलर सेक्टर में ईवी ने आईसीई यानी इंटरनल कम्बस्टन इंजन वाली गाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। देश में ईवी कम्पोनेंट का निर्माण शुरू हो गया है।”