Get App

Budget 2023: रूरल डिमांड बढ़ाने के उपायों से FMCG कंपनियों की सुधर सकती है सेहत

Budget 2023: कोरोना की महामारी के बाद फिर से आर्थिक गतिविधियां सामान्य हो गई हैं। शहरी इलाकों में मांग में भी अच्छी रिकवरी देखने को मिली है। लेकिन, ग्रामीण इलाकों में मांग अब भी कमजोर बनी हुई है। एफएमसीजी इंडस्ट्री को उम्मीद है कि बजट में मांग बढ़ाने के उपायों से उनके मार्जिन में सुधार आ सकता है

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jan 05, 2023 पर 5:35 PM
Budget 2023: रूरल डिमांड बढ़ाने के उपायों से FMCG कंपनियों की सुधर सकती है सेहत
NielsonIQ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में एफएमसीजी इंडस्ट्री के कुल वॉल्यूम में 0.9 फीसदी की कमी आई थी।

Budget 2023: इनफ्लेशन का असर एफएमसीजी कंपनियों पर भी पड़ा है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों के लिए प्रोडक्ट्स की कॉस्ट बढ़ गई है। प्रोडक्ट्स के प्राइसेज बढ़ाने से बचने के लिए कंपनियों ने उनके वजन घटाए हैं। कंपनियां अब अपना मार्जिन और वॉल्यूम बढ़ाने के बारे में सोच रही हैं। उन्हें 2023 में ग्रामीण इलाकों में मांग में सुधार आने की उम्मीद है। एफएमसीजी कंपनियों की कुल बिक्री में ग्रामीण इलाकों की एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सेदारी है। एफएमसीजी कंपनियों को उम्मीद है कि अगले यूनियन बजट (Union Budget 2023) में सरकार डिमांड बढ़ाने के उपाय कर सकती है। इससे उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ेगी। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट होगा।

सितंबर तिमाही में 0.9% घटा था वॉल्यूम

डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, "हमें साल 2023 से बहुत उम्मीद है। इस साल ग्रामीण इलाकों में मांग में मजबूती देखने को मिल सकती है। शहरों इलाकों में भी मांग अच्छी बनी रहेगी। मॉडर्न ट्रेड और ई-कॉमर्स जैसे उभरते चैनलों की मदद से बिक्री अच्छी रह सकती है।" एफएमसीजी इंडस्ट्री 2022 में प्राइस में डबल डिजिट बढ़ोतरी देख चुकी है। NielsonIQ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में एफएमसीजी इंडस्ट्री के कुल वॉल्यूम में 0.9 फीसदी की कमी आई थी।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें