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बजट 2023: फिस्कल कंसॉलिडेशन का असर इकोनॉमिक ग्रोथ पर नहीं पड़ना चाहिए, NIPFP की लेखा चक्रबर्ती की सलाह

बजट 2023 : फिस्कल कंसॉलिडेशन पर ऐसे वक्त जरूरत से ज्यादा फोकस इकोनॉमिक रिकवरी को चोट पहुंचा सकती है, जब ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। साथ ही मौद्रिक नीति में सख्ती का असर अभी दिखना बाकी है। फिस्कल कंसॉलिडेशन में इकोनॉमिक रिकवरी का ध्यान रखा जाना चाहिए

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jan 03, 2023 पर 5:38 PM
बजट 2023: फिस्कल कंसॉलिडेशन का असर इकोनॉमिक ग्रोथ पर नहीं पड़ना चाहिए, NIPFP की लेखा चक्रबर्ती की सलाह
चक्रबर्ती ने कहा कि हेल्थ और एजुकेशन के क्षेत्र में सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च सबसे जरूरी है।

बजट 2023: सरकार को इकोनॉमी में रिकवरी को देखते हुए फिस्कल पॉलिसी को एकोमोडेटिव रखना चाहिए। ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर अनिश्चितता और मौद्रिक नीति में सख्ती के बीच ऐसा करना और जरूरी हो जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) की प्रोफेसर लेखा एस चक्रबर्ती ने यह बात कही है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। उम्मीद है कि सरकार फिस्कल डेफिसिट के टारगेट को इस फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले और कम करेगी। इस फाइनेंशियल ईयर में सरकार ने फिस्कल डेफिसिट के लिए 6.4 फीसदी का टारगेट रखा है। चक्रबर्ती ने अगले यूनियन बजट को लेकर मनीकंट्रोल से व्यापक बातचीत की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को फिस्कल रूल्स के तहत फिस्कल डेफिसिट के टारगेट को जीडीपी के 3 फीसदी तक लाने के बारे में सोचना चाहिए।

फिस्कल पॉलिसी एकोमोडेटिव होनी चाहिए

चक्रबर्ती ने कहा कि जियोपॉलिटिकल रिस्क और अनिश्चितताएं काफी ज्यादा हैं। मॉनेटरी पॉलिसी का फोकस इंटरेस्ट रेट बढ़ाकर इनफ्लेशन को काबू में करने पर है। इसलिए फिस्कल पॉलिसी का एकोमोडेटिव होना जरूरी है। इसके लिए ग्रोथ के रिकवरी प्रोसेस को जारी रखते हुए फिस्कल कंसॉलिडेशन के उपाय करने की जरूरत है। एक्सपेंडिचर घटाए बगैर टैक्स कलेक्शन बढ़ाकर फिस्कल कंसॉलिडेशन का रास्ता अपनाना ज्यादा सही होगा।

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