Get App

Budget 2023: खर्च बढ़ाने पर सरकार का पहले जैसा फोकस नहीं होगा: Poll

Union Budget 2023: कोरोना की महामारी से निपटने के लिए पिछले दो-तीन सालों में सरकार ने अपना खर्च बहुत बढ़ाया है। इससे इकोनॉमी की ग्रोथ को बढ़ावा मिला है। लेकिन, इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि सरकार के लिए अपने पूंजीगत खर्च की रफ्तार आगे भी बनाए रखना मुश्किल होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 22, 2022 पर 11:54 AM
Budget 2023: खर्च बढ़ाने पर सरकार का पहले जैसा फोकस नहीं होगा: Poll
कोरोना पर खर्च की वजह से फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में फिस्कल डेफिसिट बढ़कर जीडीपी के 9.3 फीसदी पर पहुंच गया।

Budget 2023: सरकार 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट (Budget 2023) में अपनी वित्तीय स्थिति (Fiscal Conditions) ठीक करने पर फोकस करेगी। दरअसल, यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। रायटर्स के पोल से यह जानकारी मिली है। इस पोल में हिस्सा लेने वाले इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि सुस्त पड़ती इकोनॉमिक ग्रोथ सरकार को ज्यादा खर्च करने से रोकेगी। केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2014 में सत्ता आने के बाद से कर्ज लेकर खर्च करने की सरकार की परंपरा से दूरी बनाई है। सरकार ने फिस्कल कंसॉलि़डेशन (Fiscal Consolidation) यानी अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने पर फोकस किया है। हालांकि, सरकार को कोरोना की महामारी से निपटना पड़ा। इसका काफी ज्यादा असर सरकार की वित्तीय स्थिति पर पड़ा।

कोरोना की वजह से सरकार को खर्च बढ़ाना पड़ा था

कोरोना पर खर्च की वजह से फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में फिस्कल डेफिसिट बढ़कर जीडीपी के 9.3 फीसदी पर पहुंच गया। यह फिस्कल डफिसिट के 3.5 फीसदी के टारगेट से बहुत ज्यादा था। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में फिस्कल डेफिसिट 6.9 फीसदी रहा। इस फाइनेंशियल ईयर में इसके 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके आने वाले फाइनेंशियल ईयर में और कम हो जाने की उम्मीद है। रायटर्स के पोल में हिस्सा लेने वाले ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का यह मानना था कि अगले फाइनेंशियल ईयर में सरकार अपनी उधारी (Borrowing) जीडीपी के 6 फीसदी तक सीमित रखने की कोशिश करेगी।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें