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मदरसों में वंदे मातरम के 6 स्टैंजा गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा': कलकत्ता हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

Vande Mataram Controversy: कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को मदरसों में 'वंदे मातरम' के छह छंदों को अनिवार्य करने के खिलाफ दायर एक PIL पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि वंदे मातरम गाने से "आसमान नहीं गिर पड़ेगा।"

Edited By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Aug 05, 2026 पर 9:44 AM
मदरसों में वंदे मातरम के 6 स्टैंजा गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा': कलकत्ता हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
मदरसों में वंदे मातरम के 6 स्टैंजा गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा': कलकत्ता हाईकोर्ट

Vande Mataram Controversy: कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को मदरसों में 'वंदे मातरम' के छह छंदों को अनिवार्य करने के खिलाफ दायर एक PIL पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि वंदे मातरम गाने से "आसमान नहीं गिर पड़ेगा।" सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) तापब्रत चक्रवर्ती ने कहा, "हजारों ईसाई स्कूल हैं जहां सभी छात्रों से ईश्वर से प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है। तो क्या किसी खास धर्म से जुड़े छात्र यह सवाल करते हैं कि आप मुझसे ऐसी चीजें क्यों गवा रहे हैं जो ईसाई धर्म से जुड़ी हैं? इससे आसमान नहीं गिर पड़ेगा। आज अगर मुझसे कोई ऐसी बात दोहराने के लिए कहा जाए जो मेरे धर्म में नहीं है, तो क्या होगा? क्या मैं अपने धर्म से बाहर का व्यक्ति हो जाऊंगा?"

PIL दायर करने वाले की तरफ से सीनियर वकील विकास रंजन भट्टाचार्य पेश हुए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी करके 'वंदे मातरम' के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने तर्क दिया, "ऐसा कैसे किया जा सकता है? जब संविधान अपनाया गया था, तो बहुत सोच-विचार के बाद यह तय किया गया था कि केवल दो छंद ही गाए जाएंगे... अगर कोई अपनी मर्जी से इसे गाना चाहता है, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।"

भट्टाचार्य ने आगे कहा, "इससे सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ेगा। आजादी बहुत खून-खराबे के बाद मिली थी। अगर कोई इसे अनिवार्य होने के बावजूद गाने से इनकार करता है और उसे जेल हो जाती है, तो वह कानूनी मदद कैसे ले सकता है?"

हालांकि, इस मामले को लेकर कई जनहित याचिकाएं (PIL) दायर की गई हैं। इनमें से एक याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर संसद में भी चर्चा हो चुकी है। वहीं, सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) तपब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि पहली नजर में पीठ को अधिसूचना जारी करने के "अधिकार क्षेत्र" (Jurisdiction) से जुड़े तर्क में कुछ दम नजर आ रहा है। लेकिन उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या इस फैसले को लागू करने के लिए अब तक कोई सख्त कदम उठाया गया है?

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