Budget 2023: यह जानी मानी बात है कि हेल्थ पर ज्यादा सरकारी खर्च वाले देशों में नतीजे बेहतर मिलते रहे हैं। उदाहरण के लिए, भारत की तुलना में ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड में बच्चों के जन्म पर जीवन प्रत्याशा बेहतर होती है। दरअसल, 2019 में भारत सरकार का हेल्थ खर्च प्रति व्यक्ति 69 डॉलर रहा था। वहीं फिलीपींस में यह आंकड़ा 154 डॉलर, इंडोनेशिया में 175 डॉलर, चीन में 492 डॉलर, थाईलैंड में 524 डॉलर और ब्राजील में 610 डॉलर था। भारत के कमजोर स्वास्थ्य परिणाम और उम्मीद से कमजोर आर्थिक प्रदर्शन की एक वजह स्वास्थ्य पर कम सरकारी खर्च भी रहा है।
हेल्थ के लिए बजटीय अलोकेशन लगातार कम हो रहा है, जिससे 2025 तक जीडीपी की तुलना में 2.5 फीसदी का लक्ष्य हासिल करना खासा मुश्किल हो गया है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2020-21 में भारत का बजटीय आवंटन जीडीपी का महज 1.8 फीसदी था। भले ही पिछले कुछ दशकों की तुलना में यह ज्यादा है, लेकिन 2025 तक 2.5 फीसदी लक्ष्य तक पहुंचने से यह काफी दूर है।
सही तरह से खर्च करना भी है अहम
2022-23 में हेल्थ सेक्टर के लिए अलोकेशन में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन अच्छी गुणवत्ता और सस्ती यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज हासिल करने के लिए यह खासा कम था। बजटीय आवंटन बढ़ाना अहम है, लेकिन सही तरह से खर्च करना भी समान रूप से अहम है।
हेल्थ में सरकारी खर्च की पहुंच बढ़ाने से सरकार जनता द्वारा अपनी जेब से होने वाले खर्च के स्तर में कमी कर सकती है, जिससे करोड़ों भारतीय को हर साल खासी बचत हो सकती है। उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से फैमिलीज को खासी बचत हुई है। हालांकि, इस स्कीम का लाभ अभी तक बड़ी संख्या में भारतीयों को उपलब्ध नहीं है।
किशोरों के स्वास्थ्य पर हो जोर
जनता की जरूरतों को देखते हुए भारत के सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं में साल दर साल सुधार हुआ है। परिवार नियोजन सहित यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं खासी अहम है, जिससे पूरी आबादी के स्वास्थ्य और खुशहाली सुनिश्चित की जा सकती है।
किशोरों की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, सरकार को नेशनल स्वास्थ्य मिशन के तहत परिवार नियोजन कार्यक्रमों के लिए अलोकेशन में बढ़ोतरी करनी चाहिए। परिवार नियोजन के लिए अलोकेशन वर्षों से बजट का चार फीसदी से कम रहा है।
इसके लिए राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम या नेशनल एडोलेसेंट हेल्थ प्रोग्राम में ज्यादा निवेश करना भी खासा अहम होगा।
किशोरियों को मिले प्राथमिकता
Adolescent girls : विशेष रूप से कमजोर समुदायों की किशोरियों को कई चुनौतियों क सामना करना पड़ता है। वे भारत को आर्थिक और सामाजिक ताकत के अगले चरण में ले जाने के लिए सशक्त बनने के बजाय वे सामाजिक कुरीतियों की शिकार हो जाती हैं।
शिक्षा और रोजगार के लिए संघर्ष एक किशोरी के जीवन का प्रतीक है। इसके साथ कम उम्र में शादी, कम उम्र में गर्भावस्था और बच्चे का जन्म और प्रजनन क्षमता और अपने शरीर के बारे में खुद अपने निर्णय लेने में असमर्थता जैसे डर हमेशा बने रहते हैं। भारत की आधी से अधिक महिलाएं और बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं।