Budget 2024-25 : इनफ्लेशन काबू में लाने के उपायों पर सरकार का फोकस जारी रहेगा

Budget 2024-25 : पिछले दो साल में यूक्रेन क्राइसिस के साथ ही इजराइल-फिलिस्तीन का टकराव देखने को मिला। अब क्लाइमेट चेंज बड़ा ग्लोबल चैलेंज दिख रहा है। मॉर्गन स्टैनली इकोनॉमिस्ट्स ने 2024 के आउटलुक में कहा है कि कोरोना की महामारी के बाद से फूड प्राइसेज में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। 2020-2023 के बीच यह औसत 6.4 फीसदी रहा है, जबकि इससे पहले के 5 साल में यह डेटा 3.6 फीसदी था

अपडेटेड Dec 18, 2023 पर 2:56 PM
Budget 2024-25 : RBI के इनफ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क से रिटेल इनफ्लेशन कम करने में मदद मिली है। 2012 की शुरुआत में रिटेल इनफ्लेशन करीब 11 फीसदी था, जो 2014 में 6.7 फीसदी पर आ गया। 2017, 2018 और 2019 में यह औसत 4 फीसदी रहा।

Budget 2024-25 : इनफ्लेशन के खिलाफ लड़ाई जारी है। 1 फरवरी, 2024 में अंतरिम बजट और जुलाई में पेश होने वाले पूर्ण बजट (Union Budget 2024) में भी सरकार का फोकस इनफ्लेशन पर बना रहेगा। RBI ने इनप्लेशन के लिए 4 फीसदी टारगेट रखा है। पिछले दो साल में यूक्रेन क्राइसिस के साथ ही इजराइल-फिलिस्तीन का टकराव देखने को मिला। इस बीच इनफ्लेशन को काबू में करने की RBI की कोशिश जारी रही। अब क्लाइमेट चेंज बड़ा ग्लोबल चैलेंज दिख रहा है। इंडिया में इनफ्लेशन में फूड प्राइसेज का बड़ा हाथ है। मॉर्गन स्टैनली इकोनॉमिस्ट्स ने 2024 के आउटलुक में कहा है कि कोरोना की महामारी के बाद से फूड प्राइसेज में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। 2020-2023 के बीच यह औसत 6.4 फीसदी रहा है, जबकि इससे पहले के 5 साल में यह डेटा 3.6 फीसदी था। ऐसे में 1 फरवरी, 2024 को पेश होने वाले बजट में फूड आइटम्स को काबू में रखने वाले उपाय शामिल हो सकते हैं।

इनफ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क का फायदा

RBI के इनफ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क से रिटेल इनफ्लेशन कम करने में मदद मिली है। 2012 की शुरुआत में रिटेल इनफ्लेशन करीब 11 फीसदी था, जो 2014 में 6.7 फीसदी पर आ गया। 2017, 2018 और 2019 में यह औसत 4 फीसदी रहा। कोरोना की महामारी और रूस-यूक्रेन टकराव की वजह से यह 2020 में बढ़कर 6 फीसदी से ऊपर पहुंच गया। अमेरिका जैसे विकसित देशों में यह काफी ज्यादा रहा है। इसे काबू में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ा चुका है।


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2022 में RBI ने मानी थी इनफ्लेशन कंट्रोल नहीं होने की बात

इनफ्लेशन काफी हद तक हाउसहोल्ड्स और दूसरे इकोनॉमिक एजेंट्स के एक्सपेक्टेशन पर निर्भर करता है। इसलिए इनफ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क का भरोसेमंद होना जरूरी है। अगर इसमें किसी तरह की गड़बड़ी मिलती है तो उसे स्वीकार करना जरूरी है। RBI 2022 के आखिर में इनफ्लेशन को काबू में करने में अपनी असफलता स्वीकार की थी। हालांकि, इस मामले में सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में क्या है, इसका पता नहीं चला है। लेकिन, इनफ्लेशन को काबू में करने की RBI की कोशिशों को देखा जा सकता है।

RBI और सरकार ने मिलकर की कोशिश

RBI और सरकार ने मिलकर इनफ्लेशन को काबू में करने की कोशिश की है। केंद्रीय बैंक ने सप्लाई से जुड़े कुछ उपाय करने की सलाह केंद्र को दी है। खासकर फूड आइटम्स की कीमतों को नीचे लाने के लिए ऐसा करना जरूरी था। RBI की MPC की मेंबर अशिमा गोयल ने कहा था कि सरकार और RBI के मिलकर काम करने से अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। हालांकि, कुछ साल पहले सरकार और RBI में इस तरह का तालमेल नहीं दिखा था। RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और उर्जित पटेल के कार्यकाल में केंद्र और केंद्रीय बैंक के रिश्ते काफी औपचारिक थे।

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