Budget 2024-25 : यूनियन बजट इकोनॉमी से जुड़ा सबसे व्यापक डॉक्युमेंट है। केंद्र सरकार बजट में हर साल मंत्रालयों के लिए पैसे का आवंटन करती है। वित्तमंत्री की तरफ से नई स्कीमों का ऐलान किया जाता है। कई नए प्रोजेक्ट्स के ऐलान किए जाते हैं। कुछ प्रोजेक्ट्स एक साल के होते हैं तो कुछ कई साल में पूरे होते हैं। इनके लिए बड़े फंड का आवंटन किया जाता है। यूनियन बजट चूंकि हर साल पेश किया जाता है जिससे एक बजट में किए सभी ऐलान को ट्रैक करना मुश्किल होता है। नए बजट पेश होने तक आम तौर पर लोग पिछले बजट में किए आवंटन और ऐलान को भूल जाते हैं। आउटलुक बजट का मकसद अलग-अलग मंत्रालयों के प्रदर्शन और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की प्रगति का आकलन करना है।
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने की थी शुरुआत
सबसे पहले एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स कमीशन की सिफारिश पर 1969 में मंत्रालयों के प्रदर्शन को टैक करने की जरूरत महसूस की गई। लेकिन, इस दिशा में की गई पहले बहुत कारगर साबित नहीं हुई। यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में इस ओर फिर से ध्यान दिया गया। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने वित्त वर्ष 2005-06 के यूनियन बजट में आउटकम बजट की शुरुआत की। यह तय किया गया कि सरकार पिछले बजट के नतीजों का प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करेगी। इसमें यह बताया जाएगा कि केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों ने बजट में आवंटित पैसे का कितना इस्तेमाल किया, किस तरह इस्तेमाल किया और उसका कितना कारगर इस्तेमाल हुआ। आउटकम बजट में सरकार के सभी प्रोग्राम के प्रोग्रेस की जांच भी की जाती है। वित्त वर्ष 2006-07 से हर मंत्रालय अपने तहत आने वाले सेक्टर का एक आउटकम बजट फाइनेंस मिनिस्ट्री को पेश करती है।
मकसद पूरा करने में असफल रहा है आउटकम बजट
सरकार की कोशिश के बावजूद आउटकम बजट अपने मकसद को पूरा करने में सफल नहीं रहा है। इसकी न तो मीडिया में ज्यादा चर्चा होती है और न ही आर्थिक हलकों में इसे लेकर ज्यादा चर्चा होती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यह बहुत जटिल होता है। यह इतना व्यापक होता है कि इसे समझना आसान नहीं होता है। इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2023-24 में पेश आउटकम बजट 280 पेज का था। वित्त वर्ष 2022-23 में पेश आउटकम बजट 297 पेज का था। इसमें इकोनॉमी से जुड़े कई आंकड़े होते हैं लेकिन पिछले वित्त वर्ष के लिए तय किए टारगेट के बारे में खास जानकारी नहीं होती है।
सरकार कर सकती है ये सुधार
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आउटकम बजट पेश करने का मकसद तभी पूरा होगा, जब इसे कॉम्पैक्ट बनाया जाएगा। इसमें सिर्फ मंत्रालयो से जुड़े उन आंकड़ों को शामिल करने की जरूरत है, जिनका महत्व मैक्रो इकोनॉमी के लिए है। खास प्रोग्राम और प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस रिपोर्ट पर खास जोर देने की जरूरत है। इसके अलावा मंत्रालयों के खर्च करने के पैटर्न की भी जानकारी इसमें होनी चाहिए। इससे मीडिया, इकोनॉमिस्ट्स सहित आम लोगों की दिलचस्पी इसमें बढ़ेगी।