Budget 2024 : बैंकिंग इंडस्ट्री को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के यूनियन बजट से ज्यादा उम्मीद नहीं है। ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है। बैंकों की एसेट क्वालिटी बेहतर हुई है। इसलिए यूनियन बजट 2024 (Union Budget 2024) में बैंकों के लिए नई पूंजी के ऐलान की उम्मीद नहीं है। पिछले कुछ सालों में इंडियन बैंकिंग सेक्टर की सेहत में काफी सुधार हुआ है। बैड लोन में कमी आई है। सितंबर 2023 में शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) रेशियो घटकर 3.2 फीसदी पर आ गया है। नेट नॉन-परफॉर्मिंग रेशियो घटकर 0.8 फीसदी पर आ गया। RBI ने दिसंबर में अपनी फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। पिछले 10 यूनियन बजटों में सरकार ने तीन बार सरकारी बैंकों के लिए पूंजी का ऐलान किया है। कुल मिलाकर 3.35 लाख करोड़ रुपये की पूंजी सरकार ने पीएसयू बैंकों को दी है।
पिछले बजटों में सरकार से मिली हैं पूंजी
सरकार से पूंजी मिलने से सरकारी बैंकों को दो तरह से फायदा होता है। पहला, उन्हें रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट का पालन करने में मदद मिलती है। दूसरा, उन्हें कर्ज की बढ़ती मांग का फायदा उठाने में मदद मिलती है। सरकार ने 2014-15 के यूनियन बजट में सरकारी बैंकों को साल 2018 तक 2.40 लाख करोड़ रुपये की पूंजी उपलब्ध कराने का ऐलान किया था। FY2017 के बजट में सरकारी बैंकों को अतिरिक्त 25,000 करोड़ रुयये की पूंजी उपलब्ध कराने का ऐलान बजट में हुआ था। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 के यूनियन बजट में कहा था कि सरकारी बैंकों को 70,000 करोड़ रुपये की पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी।
बजट के बाहर भी दी गई पूंजी
सरकार ने यूनियन बजट से बाहर भी सरकारी बैंकों को पूंजी दी है। फरवरी 2021 में सीतारमण ने सरकारी बैंकों के लिए वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 20,000 करोड़ रुपये की पूंजी देने का ऐलान किया था। साल 2021 के मार्च में ही सरकार ने जीरो कूपन बॉन्ड्स के जरिए 14,500 करोड़ रुपये की पूंजी देने का ऐलान किया था।
SBI में सरकार की 57 फीसदी हिस्सेदारी
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में 57.49 फीसदी हिस्सेदारी है। बैंक ऑफ बड़ौदा में सरकार की 63.97 फीसदी हिस्सेदारी है। पंजाब नेशनल बैंक में सरकार की 73.15 फीसदी हिस्सेदारी है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में सरकार की 76.99 फीसदी, केनरा बैंक में 63.93 फीसदी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 93.08 फीसदी हिस्सेदारी है। इंडियन बैंक में सरकार की 73.84, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 86.46 फीसदी और बैंक ऑफ इंडिया में 73.88 फीसदी हिस्सेदारी है। केंद्र और राज्य सरकारों की पंजाब एंड सिंध बैंक में 98.25 फीसदी, इंडियन ओवरसीज बैंक में 96.38 फीसदी और यूको बैंक में 95.39 फीसदी हिस्सेदारी है।