Budget 2024 : साल 2023 इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए उतार-चढ़ाव वाला रहा। यूनियन बजट 2023 के एक बड़े ऐलान का सीधा असर लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री पर पड़ा। सरकार ने उन लाइफ इंश्योरेंस के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स छूट वापस ले लिया, जिनका सालाना प्रीमियम 5 लाख रुपये से ज्यादा था। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने यूनियन बजट 2023 (Union Budget 2023) में कहा था कि यह फैसला 31 मार्च, 2023 के बाद खरीदी जाने वाली लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर लागू होगा। इसे लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए बड़े झटके के रूप में देखा गया। कई लोग टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में बड़े अमाउंट इनवेस्ट कर रहे थे। सरकार का फैसले का मकसद ऐसे निवेश पर रोक लगाना था।
IRDAI ने किए बड़े रिफॉर्म्स के ऐलान
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने इस साल कई रिफॉर्म्स के ऐलान किए। इनमें एक्सपेंसेज ऑफ मैनेजमेंट (EoM) और पेमेंट ऑफ कमीशन रूल्स शामिल थे। बीमा सुगम पर भी काम चल रहा है। यह पूरी इंडस्ट्री के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसका इस्तेमाल पॉलिसी बेचने, पॉलिसी से जुड़ी सेवाओं और क्लेम के लिए होगा। इसे लाइफ इंश्योरेंस के लिए UPI जैसे बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के साथ ही इंश्योरेंस इंडस्ट्री बीमा को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी कोशिश कर रही हैं।
लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री सरकार से क्या चाहती है?
बजट 2024 से लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को क्या उम्मीदें हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए मनीकंट्रोल ने लाइफ इंडस्ट्री के कुछ दिग्गज लोगों से बातचीत की। Federal Life Insurance के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर विग्नेश शहाणे ने कहा कि 1 फरवरी, 2024 को पेश होने वाले यूनियन बजट में इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए बड़े ऐलान होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री सरकार से लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज के लिए अलग से टैक्स डिडक्शन की मांग करती रही है। अभी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत करीब एक दर्जन इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश पर टैक्स डिडक्शन की सुविधा मिलती है। लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी इनमें से एक है। उन्होंने कहा कि लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री सरकार से एन्युटी इनकम को भी टैक्स-फ्री करने की मांग करती रही है। लेकिन, सरकार ने अब तक इंडस्ट्री की मांग पूरी नहीं की है।
आबादी के बड़े हिस्से की पहुंच बीमा तक नहीं
अभी इंडिया में लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की पहुंच आबादी के बड़े हिस्से तक नहीं है। जिन लोगों ने लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी है, उनका इंश्योरेंस कवर पर्याप्त नहीं है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंश्योरेंस (NIA) के हाल के एक सर्वे के नतीजे बताते हैं कि सिर्फ 13 फीसदी लोगों के पास पर्याप्त इंश्योरेंस कवर है। इसका मतलब है कि 87 फीसदी आबादी के पास या तो किसी तरह का इंश्योरेंस कवर नही है या कवर पर्याप्त नहीं है।
कम प्रीमियम वाले इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पेश करने की जरूरत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों तक बीमा का लाभ पहुंचाने के लिए सस्ते इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स लाने होंगे। लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री कम प्रीमियम वाली लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लाने पर विचार कर सकती हैं। ये टर्म पॉलिसी होंगी। ऐसी पॉलिसी पर सरकार अपनी तरफ से सब्सिडी दे सकती है। इससे आबादी के बड़े हिस्से को इंश्योरेंस के दायरे में लाना मुमकिन होगा।