Budget 2024: इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सरकार भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दे रही है। इससे पेट्रोल-डीजल की मांग घटेगी। देश में क्रूड ऑयल का बहुत कम उत्पादन होता है। इसलिए सरकार को 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड ऑयल का आयात करना पड़ता है। इस पर काफी ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च होती है। साथ ही पेट्रोल और डीजल के इस्तेमाल से प्रदूषण बढ़ता है। इस साल सितंबर में देश में रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की संख्या 27 लाख से थोड़ी ज्यादा थी। इस साल तीसरी तिमाही में ईवी की बिक्री 3,71,214 यूनिट्स रही। यह एक साल पहले की समान अवदि के मुकाबले 40 फीसदी ज्यादा है। वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman ने 1 फरवरी, 2023 को पेश यूनियन बजट में ईवी को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए थे।
देश में ईवी बैटरीज के उत्पादन से होगा फायदा
सीतारमण ने FAME स्कीम -2 का बजट दोगुना कर दिया था। ईवी की बैटरीज की ड्यूटी पर रियायत जारी रखने का ऐलान किया था। FAME का मतलब है-Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles। वित्त मंत्री ने लिथियम-इयोन बैटरीज पर कस्टम ड्यूटी को 21 फीसदी से घटाकर 13 फीसदी कर दिया था। इससे बैटरी बनाने वाली कंपनियों को काफी राहत मिली थी। साथ ही इससे देश में ईवी बैटरीज का उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों को मजूबती मिली है। इससे पहले सरकार ने ईवी बैटरीज मैन्युफैक्चरिंग को भी PLI स्कीम के तहत लाने का ऐलान किया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडिया में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बैटरी का उत्पादन होने पर उनकी लागत में कमी आएगी। इसका असर ईवी की कीमतों पर पड़ेगा। अभी ईवी की कीमत में बैटरी की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है।
ईवी के स्पेयर पार्ट्स पर टैक्स घटाने से बढ़ेगी ईवी की बिक्री
सरकार ने बजट 2023 में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए थे। लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईवी के स्पेयर पार्ट्स पर जीएसटी के रेट का मसला अब तक हल नहीं हुआ है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर जीएसटी का रेट 5 फीसदी है। लेकिन, ईवी के स्पेयर पार्ट्स (बैटरीज को छोड़कर) पर अभी 28 फीसदी टैक्स लगता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को इसे जल्द घटाने की जरूरत है। इसे घटाने से ईवी के मेंटेनेंस चार्ज में कमी आएगी। इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी।