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Budget 2024: खपत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए हो सकते हैं ऐलान

Budget 2024: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कृषि क्षेत्र की वृद्धि उतनी नहीं है जितना सरकार मानकर चल रही थी। सरकार का इरादा कृषि आय को दोगुना करने का था लेकिन महंगाई की वजह से इसे अभी तक हासिल नहीं किया जा सका है। चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 1.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। खपत बढ़ाने का एक प्रमुख तरीका नई कर व्यवस्था में कुछ बदलाव कर इसे अधिक आकर्षक बनाना हो सकता है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 14, 2024 पर 12:14 PM
Budget 2024: खपत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए हो सकते हैं ऐलान
सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा करदाता नई कर व्यवस्था को अपनाएं।

Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को पेश हो रहे अंतरिम बजट में खपत (Consumption) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के अलावा महंगाई को नीचे लाने के उपायों को जारी रखेंगी। ऐसा अनुमान विशेषज्ञों ने जताया है। यह सीतारमण का लगातार छठा बजट होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि खपत को बढ़ावा देने का एक तरीका लोगों के हाथों में अधिक पैसा देना है। ऐसा करने का एक संभावित तरीका टैक्स स्लैब में बदलाव करना या स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी के जरिये लोगों पर टैक्स का बोझ कम करना हो सकता है। एक अन्य प्रस्ताव ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 'मनरेगा' के तहत धनराशि बढ़ाने और किसानों के लिए अधिक भुगतान से संबंधित है।

विशेषज्ञों ने कहा कि आम चुनाव से पहले खपत को बढ़ावा देने के सीतारमण के प्रयास के तहत महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकते हैं। आमतौर पर आम चुनावों से पहले लोकसभा में पेश किए जाने वाले अंतरिम बजट में नए टैक्स प्रपोजल्स या नई स्कीम्स शामिल नहीं होती हैं। चुनावों से पहले बजट में बड़ी घोषणाएं नहीं की जा सकती हैं।

तत्काल समाधान की जरूरत वाली समस्याओं पर आ सकते हैं प्रस्ताव

अंतरिम बजट में सरकार वित्त वर्ष 2024-25 के 4 माह के लिए अपने खर्चों को पूरा करने के लिए संसद से इजाजत मांगेगी। इसमें तत्काल ऐसी आर्थिक समस्याओं के समाधान के प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं, जिनके लिए चार महीने तक इंतजार नहीं किया जा सकता। चुनावों के बाद, नई सरकार बनने के बाद जुलाई माह में पूर्ण बजट पेश किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अर्थव्यवस्था में सुस्त खपत मांग से संबंधित मुद्दों का समाधान करने की तत्काल जरूरत है।

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