Budget 2024 : लाइफ इंश्योरेंस पर अलग डिडक्शन और जीएसटी रेट में कमी चाहती है इंश्योरेंस इंडस्ट्री

Budget 2024 : इंश्योरेंस सेक्टर को बजट से काफी उम्मीदें हैं। पिछले साल बजट में वित्तमंत्री ने लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को झटका दिया था। इस बार वह इस इंडस्ट्री के लिए राहत का ऐलान कर सकती है। आबादी के बड़े हिस्से को इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराने पर सरकार का फोकस रहा है। इसके लिए अंतरिम बजट में कुछ उपायों का ऐलान हो सकता है

अपडेटेड Jan 13, 2024 पर 2:26 PM
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Budget 2024 : अभी इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर जीएसटी का रेट 18 फीसदी है। इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के तहत आबादी के बड़े हिस्से को लाने के लिए प्रोडक्ट्स के प्रीमियम में कमी बहुत जरूरी है। अगर सरकार इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर जीएसटी का 5 फीसदी रेट लागू करती है तो इससे इंश्योरेंस पॉलिसी सस्ती हो जाएगी।

Budget 2024 : यूनियन बजट से हर सेक्टर की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसकी वजह यह है कि यह बजट लोकसभा चुनावों से कुछ महीने पहले आ रहा है। वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। यह अंतरिम बजट होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम तौर पर सरकार अंतरिम बजट में बड़े ऐलान से बचती है। लेकिन 2019 के अंतरिम बजट में सरकार ने कई बड़े ऐलान किए थे। इंश्योरेंस सेक्टर को भी इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। पिछले साल बजट में वित्तमंत्री ने लाइफ इंश्योरेंस इंडस्ट्री को झटका दिया था। इस बार वह इस इंडस्ट्री के लिए राहत का ऐलान कर सकती है। आबादी के बड़े हिस्से को इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराने पर सरकार का फोकस रहा है। इसके लिए अंतरिम बजट में कुछ उपायों का ऐलान हो सकता है।

बजट 2024 : टैक्स छूट बढ़ाने की जरूरत

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के चीफ बिजनेस अफसर (लाइफ इंश्योरेंस) संतोष अग्रवाल ने कहा है कि इंडिया में लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में लोगों की दिलचस्पी दिखाने की एक बड़ी वजह इस पर मिलने वाली टैक्स छूट रही है। बड़ी संख्या में लोग सिर्फ टैक्स बचाने के मकसद से लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं। इसलिए अगर सरकार लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर टैक्स छूट बढ़ाती है तो इससे आबादी के बड़े हिस्से को इंश्योरेंस के दायरे में लाने में मदद मिलेगी। IRDA के विजन 2047 में सबको इंश्योरेंस कवर के दायरे में लाने की बात कही गई है।


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बजट 2024 : लाइफ इंश्योरेंस के लिए डिडक्शन की अलग लिमिट

उन्होंने कहा कि लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर डिडक्शन अभी इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत मिलता है। इस सेक्शन के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स आते हैं। चूंकि, इस सेक्शन के तहत निवेश के लिए 1.50 लाख रुपये की सीमा तय है, जिससे पीपीएफ और बच्चों की ट्यूशन फीस आदि से ही यह लिमिट पूरी हो जाती है। ऐसे में इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स खासकर टर्म इंश्योरेंस के लिए अलग से डिडक्शन की लिमिट तय करने की जरूरत है। इससे टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी टर्म इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में बढ़ेगी। टर्म इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स प्रोटेक्शन के लिहाज से अच्छा माना जाता है। इसका प्रीमियम कम होता है।

बजट 2024 : जीएसटी की रेट में कमी जरूरी

इंश्योरेंस इंडस्ट्री की दूसरी बड़ी मांग इंश्योरेंस पॉलिसी पर जीएसटी के रेट में में कमी को लेकर है। अभी इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर जीएसटी का रेट 18 फीसदी है। इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के तहत आबादी के बड़े हिस्से को लाने के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स के प्रीमियम में कमी बहुत जरूरी है। अगर सरकार इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर जीएसटी का 5 फीसदी रेट लागू करती है तो इससे इंश्योरेंस पॉलिसी सस्ती हो जाएगी। सरकार को पेंशन प्रोडक्ट्स के लिए उसी तरह के नियम लागू करने की जरूरत है, जो नियम एनपीएस के लिए है। इससे पेंशन प्रोडक्ट्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। साथ ही एन्युटी इनकम को टैक्स छूट देने की जरूरत है।

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