फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) ट्रेडिंग करने वालों को यूनियन बजट से बड़ा झटका लग सकता है। उन्हें इससे होने वाली इनकम पर ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ सकता है। इसके लिए सरकार एफएंडओ ऑप्शंस से हुई इनकम को लॉटरी या क्रिप्टोकरेंसी से हुई इनकम मान सकती है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर में यह बताया गया है। लॉटरी से हुई इनकम पर काफी ज्यादा टैक्स लगता है। यही स्थिति क्रिप्टोकरेंसी से हुई इनकम के साथ है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस कदम से सरकार को दो तरह से फायदा हो सकता है। पहला, एफएंडओ (F&O) इनकम पर ज्यादा टैक्स से उसकी कमाई बढ़ेगी। दूसरा, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (Futures and Options)ट्रेडिंग में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी घटेगी।
अभी क्या है टैक्स का नियम
अभी F&O ट्रांजेक्शन से हुई इनकम को बिजनेस इनकम माना जाता है। इस पर इनवेस्टर्स के स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि इनवेस्टर के लिए टैक्स के रेट 5 फीसदी, 20 फीसदी और 30 फीसदी हो सकते हैं। इसके अलावा एफएंडओ से हुए लॉस को दूसरी बिजनेस एक्टिविटीज के गेंस के साथ एडजस्ट करने की भी इजाजत है। अगर सरकार एफएंडओ ट्रांजेक्शन पर TDS लगाती है तो वह इनवेस्टर को करीब रूप से ट्रैक कर सकेगी।
टैक्स नियम में बदलाव की वजह
सरकार एफएंडओ इनकम पर टैक्स के नियमों में बदलाव करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसका ऐलान यूनियन बजट में किया जा सकता है। दरअसल, सरकार डेरिवेटिव मार्केट में रिटेल इनवेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी से चिंतित है। मार्केट क्रैश करने पर इन रिटेल इनवेस्टर्स को बड़ा लॉस हो सकता है। पिछले पांच सालों में डेरिवेटिव मार्केट में रिटेल इनवेस्टर्स का पार्टिसिपेशन पांच गुना हो गया है।
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नए नियम से क्या बदलाव आएगा
सरकार F&O ट्रांजेक्शन से जुड़े टैक्स के नियमों में बदलाव कर इसे 'बिजनेस इनकम' की जगह 'स्पेकुलेटिव इनकम' मान सकती है। साथ ही इस पर TDS भी लगाया जा सकता है। ऐसा होने पर F&O से हुई इनकम पर लॉटरी और क्रिप्टोकरेंसी से इनकम पर लगने वाले टैक्स का रेट लागू होगा। सरकार का मानना है कि टैक्स बढ़ने से रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी एफएंडओ में घटेगी।