इस महीने पेश होने वाले यूनियन बजट में फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए ऐलोकेशन बढ़ने की उम्मीद नहीं है। इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये का एलोकेशन किया था। यह फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में 1.89 लाख करोड़ रुपये के एलोकेशन से 13 फीसदी कम है। एक सरकारी अफसर ने यह जानकारी दी।
यूरिया का आयात कम रहने की उम्मीद
अफसर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि फर्टिलाइजर सब्सिडी (Fertiliser subsidy) के लिए ऐलोकेशन में ज्यादा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह यह है कि नैनो यूरिया के ज्यादा इस्तेमाल और ग्लोबल इनपुट प्राइसेज में स्थिरिता से इस वित्त वर्ष में यूरिया का इंपोर्ट काफी कम रहने की उम्मीद है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फर्टिलाइजर की इनपुट कॉस्ट 2022-23 के पीक से काफी नीचे आ गई है।
2022-23 में पीक पर फर्टिलाइजर सब्सिडी
पिछले पांच साल में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर सरकार का खर्च काफी ज्यादा रहा है। 2022-23 में यह 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया था। फर्टिलाइजर की ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से ऐसा हुआ था। अब सरकार नैनो यूरिया, पीएम प्रणाम जैसे उपायों से फर्टिलाइजर सब्सिडी पर खर्च घटाने की कोशिश कर रही है। पीएम प्रणाम योजना के जरिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल घटाने की कोशिश की जा रही है।
यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर फोकस
सरकार यूरिया इंपोर्ट पर होने वाले खर्च में भी कमी लाने की कोशिश कर रही है। सरकार की कोशिश 2023-24 में 31,000 करोड़ रुपये के मुकाबले FY25 में यूरिया इंपोर्ट बिल 21,000 करोड़ रुपये तक रखने की है। सरकार ने कहा है कि वह यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहती है। इससे 2025 के अंत तक यूरिया इंपोर्ट बिल घटकर शून्य रह जाने की उम्मीद है। फर्टिलाइजर की कुल खपत में यूरिया की हिस्सेदारी 55-60 फीसदी है।
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अगले साल के अंत तक नहीं करना पड़ेगा यूरिया का आयात
मोदी 2.0 सरकार में फर्टिलाइजर मिनिस्टर मनसुख मांडविया ने कहा था कि सरकार का एजेंडा स्पष्ट है। 2025 के अंत तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य यूरिया के आयात पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करना है। 2025-26 तक नैनो यूरिया के 8 प्लांट्स के शुरू हो जाने की उम्मीद है। इनकी क्षमता 44 करोड़ बोतल की होगी। यह 195 लाख टन पारंपरिक यूरिया के बराबर होगा।