Budget 2024 expectations: आईबीसी 2.0 में संसोधन के प्रस्तावों का ऐलान कर सकती है सरकार

Budget 2024: सरकार काफी समय से इनसॉल्वेंसी कोड में संशोधन की कोशिश कर रही है। इस बारे में जनवरी 2023 में लोगों की राय मांगी गई थी। सरकार फॉस्टट्रैक कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन के लिए भी प्रोसेस में बदलाव कर सकती है

अपडेटेड Jul 05, 2024 पर 4:41 PM
Budget 2024 expectations: अभी NCLT में किसी मामले के जाने के बाद रिजॉल्यूशन में 600 दिन तक समय लग जाता है।

सरकार पिछले साल से इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) 2.0 में कई संशोधन के बारे में सोच रही है। इनसॉल्वेंसी फ्रेमवर्क को मजबूत बनाना इसका मकसद है। इनमें बड़ी कंपनियों के लिए प्री-पैक इनसॉल्वेंसी फ्रेमवर्क, ग्रुप इनसॉल्वेंसी, समयबद्ध एडमिशन प्रोसेस आदि शामिल हैं। इस महीने के तीसरे हफ्ते में पेश होने वाले बजट में सरकार इन संशोधनों को शामिल कर सकती है। इससे मुश्किल में फंसी कंपनियों का समय पर रिजॉल्यूशन हो सकेगा।

सरकार ने संशोधन प्रस्तावों पर लोगों की राय मांगी थी

एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया, "आईबीसी (IBC) में संसोधन के लिए कोशिश चल रही है। इस बारे में मंत्रालयों के बीच बातचीत हुई है।" इस बारे में जनवरी 2023 में लोगों की राय मांगी गई थी। सरकार फॉस्टट्रैक कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन के लिए प्रोसेस में बदलाव कर सकती है। फाइनेंशियल क्रेडिटर्स को ज्यूडिशियल प्रोसेस के बाहर कॉर्पोरेट डेटर के लिए इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू करने की इजाजत दी जा सकती है।


प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी का दायरा बढ़ सकता है

इस प्रक्रिया में एडजुकेटिंग अथॉरिटी को कुछ हद तक शामिल किया जाएगा ताकि अंतिम नतीजों को कानूनी रूप दिया जा सके। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल एक निश्चित एसेट साइज के कॉर्पोरेट डेटर के लिए किया जा सकेगा। एसेट साइज को सरकार नोटिफाइ करेगी। सरकार बड़ी कंपनियों के लिए प्री-पैकेज्ड इनसॉल्वेंसी प्रोसेस का दायरा बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इससे स्ट्रेस्ड एसेट के लिए कॉस्ट-इफेक्टिव रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू किया जा सकेगा।

अभी NCLT में मामला जाने के बाद 600 दिन लग जाते हैं

सरकार ग्रुप इनसॉल्वेंसी को आसान बनाने के लिए भी संशोधन पर विचार कर रही है। इससे कॉर्पोरेट ग्रुप के लिए कंसॉलिडेटेड इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन की इजाजत मिल सकेगी। इससे प्रोसेस आसान हो जाएगा और मामलों को नतीजों तक पहुंचाया जा सकेगा। अभी NCLT में किसी मामले के जाने के बाद रिजॉल्यूशन में 600 दिन तक समय लग जाता है। इसकी बड़ी वजह लोन की वैधता स्थापित करने में आने वाली चुनौतियां है।

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NeSL रिपॉजिटरी का इस्तेमाल करने की सलाह

सरकारी बैंकों ने इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कंपनी मामलों के मंत्रालय को NeSL रिपॉजिटरी का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इससे आसानी से लोन की वैधता स्थापित की जा सकेगी। अगर इसे लागू किया जाता है तो एनसीएलटी में एडमिशन में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। NeSL एक सरकारी कंपनी है, जो डेट पर सबूतों की रिपॉजिटरी का काम करती है।

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