यूनियन बजट ऐसे वक्त पेश होने जा रहा है, जब इकोनॉमी की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग है, विदेशी मुद्रा भंडार अच्छी स्थिति में है और कंपनियों-बैंकों की बैलेंसशीट मजबूत है। लेकिन, फूड इनफ्लेशन कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कंजम्प्शन डिमांड कमजोर है। प्राइवेट इनवेस्टमेंट कम है। इन तीनों के लिए कदम उठाने की जरूरत है। यह भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि इस वित्त वर्ष की एक तिमाही बीत चुकी है। ऐसे में बजट में उठाए जाने वाले कदमों का असर इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही पर पड़ेगा। इस समय चार प्राथमिकताएं दिख रही हैं:
