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Budget 2024: FY24 में जीएसटी कलेक्शन से मालामाल हो जाएगी सरकार, टारगेट से ज्यादा रहेगा कलेक्शन

Union Budget 2024 : निर्मला सीतारमण ने 4 दिसंबर को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि इस साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 1.87 लाख करोड़ रुपये रहा। इस वित्त वर्ष में हर महीने जीएसटी कलेक्शन 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है। 1 दिसंबर को नवंबर के जीएसटी कलेक्शन के जीएसटी के आंकड़े जारी किए गए

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 13, 2023 पर 6:07 PM
Budget 2024: FY24 में जीएसटी कलेक्शन से मालामाल हो जाएगी सरकार, टारगेट से ज्यादा रहेगा कलेक्शन
Union Budget 2024 : जीएसटी कलेक्शन में सेंट्रल जीएसटी, स्टेट जीएसटी और इंटिग्रेटेग जीएसटी से होने वाला कलेक्शन शामिल है। सेंट्रल जीएसटी को CGST कहा जाता है। इससे होने वाला कलेक्शन कंसॉलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया में जाता है।

Union Budget 2024: वित्त वर्ष 2023-24 में जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) बजट 2023 में तय लक्ष्य को पार कर सकता है। सरकार हर महीने जीएसटी कलेक्शन के शानदार आंकड़ों से बहुत उत्साहित है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि 1 फरवरी, 2024 को पेश होने वाले अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) जीएसटी कलेक्शन के FY24 के टारगेट को संशोधित कर सकती हैं। इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में जीएसटी कलेक्शन 13.32 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के जीएसटी कलेक्शन के मुकाबले 12 फीसदी ज्यादा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद को बताया था कि जुलाई 2017 में जीएसटी की व्यवस्था लागू हुई थी। तब से जीएसटी कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है।

अप्रैल में रिकॉर्ड 1.87 लाख करोड़ कलेक्शन

निर्मला सीतारमण ने 4 दिसंबर को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि इस साल अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 1.87 लाख करोड़ रुपये रहा। इस वित्त वर्ष में हर महीने जीएसटी कलेक्शन 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है। 1 दिसंबर को नवंबर के जीएसटी कलेक्शन के जीएसटी के आंकड़े जारी किए गए। नवंबर के जीएसटी कलेक्शन के आकड़े आने के बाद इस वित्त वर्ष हर महीने औसत जीएसटी कलेक्शन का भी पता चला है। यह 1.67 लाख करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष 2022-23 में यह डेटा 1.51 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2021-2 में यह आंकड़ा 1.24 लाख करोड़ रुपये था। जिस साल जीएसटी की व्यवस्था लागू हुई थी यानी वित्त वर्ष 2017-18 में यह सिर्फ 89,885 करोड़ रुपये था।

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