Budget 2024 : सरकार यूनियन बजट (Union Budget 2024) में अपने संभावित खर्च के बारे में बताती है। वह बताती है कि अगले वित्त वर्ष में सरकार कुल कितने पैसे खर्च करेगी। यह एक अनुमान होता है। वास्तविक खर्च इस अनुमान से आम तौर पर ज्यादा होता है। 1 फरवरी को वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman यूनियन बजट में अगले वित्त वर्ष में सरकार के खर्च के अनुमान के बारे में बताएंगी। इंडिया एशियाई देशों में खर्च के मामले में दूसरे पायदान पर है। मनीकंट्रोल ने इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, चीन और अमेरिका के खर्च के बारे में जानने की कोशिश की है। इंडिया के खर्च में केंद्र और राज्य सरकारों का खर्च शामिल है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिया के ज्यादा फिस्कल डेफिसिट की असल वजह सरकार का ज्यादा खर्च है। सरकार हर साल अपने पूंजीगत खर्च में इजाफा करती है। इसका मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर सहित हेल्थ, एजुकेशन जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना होता है।
एशिया में चीन पहले पायदान पर
वित्त वर्ष 2024 में खर्च के मामले में अमेरिका नंबर वन रहा। उसने अपने जीडीपी का करीब 37 फीसदी खर्च किया। चीन ने अपने जीडीपी का करीब 33 फीसदी खर्च किया। इंडिया ने अपने जीडीपी का करीब 27 फीसदी खर्च किया। एशिया में सबसे ज्यादा खर्च के मामले में चीन पहले पायदान पर है। इंडिया दूसरे पायदान पर है। थाईलैंड ने अपने जीडीपी का करीब 25 फीसदी खर्च किया। इन सभी देशों ने कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद अपने खर्च बढ़ाए। इसकी वजह हेल्थ सेवाओं पर सरकार का ज्यादा फोकस था। महामारी से संक्रमित लोगों के इलाज के लिए सरकार के नए अस्पताल बनाने पड़े। सरकार को नई मशीन और इक्विपमेंट खरीदने पड़े।
कोरोना की महामारी के दौरान बढ़ा खर्च
कोरोना की महामारी के दौरान अमेरिका ने सबसे ज्यादा खर्च बढ़ाए। इसकी वजह यह है कि सरकार ने लॉकडाउन के दौरान लोगों को पैसे दिए। तब आर्थिक गतिविधियां रुक जाने से लोगों की कमाई बंद हो गई थी। इसलिए सरकार ने लोगों को पैसे दिए। हालांकि, इससे इकोनॉमी में इनफ्लेशन बढ़ गया। इसे काबू में करने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक को कई कदम उठाने पड़े। इंडिया में भी इनफ्लेशन में इजाफा देखने को मिला, लेकिन यह अमेरिका के मुकाबले कम था।
सरकार के खर्च में कमी आने का उम्मीद नहीं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिया के मामले में सरकार के खर्च में कमी आने की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह यह है कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी सुविधाओं पर अपना फोकस बढ़ाया है। इसलिए सरकार ज्यादा पूंजीगत खर्च कर रही है। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने पर भी फोकस बढ़ा रही है। इन वजहों से सरकार के खर्च में कमी आने की उम्मीद नहीं की जा सकती।