Union Budget 2024 : स्टॉक मार्केट्स के प्रमुख सूचकांक जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। उसके बाद उनमें गिरावट आई है। यूनियन बजट 2024 आने से 2 हफ्ते पहले बाजार की गिरावट ने इनवेस्टर्स की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण अंतरिम बजट पेश करेंगी। इसमें किसी बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं है। एनालिस्ट्स का कहना है कि अंतरिम बजट आने से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव इस बात का संकेत है कि इनवेस्टर्स बाजर को लेकर अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि 1 फरवरी को पेश बजट में सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर बना रहेगा। सरकार प्राइवेट सेक्टर को भी निवेश के लिए प्रोत्साहित करना चाहेगी। इनवेस्टर्स को उम्मीद है कि सरकार पिछले साल की अपनी स्ट्रेटेजी को जारी रखेगी, जिसमें इंफ्रा पर लंबी अवधि के निवेश के साथ ही सस्टेनेबल इकोनॉमिक डेवलपमेंट पर फोकस रखा गया है।
पिछले दो अंतरिम बजटों में बाजार की प्रतिक्रिया
पिछले दो अंतरिम बजट के रिकॉर्ड को देखें तो सेंसेक्स की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है। 2019 में वोट-ऑन-अकाउंट के बाद स्टॉक बाजार में करीब एक फीसदी की गिरावट आई थी। लेकिन, 2014 के अंतरिम बजट के बाद एक महीने में बाजार 6 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था। हालांकि, दोनों अंतरिम बजट पेश होने के बाद के तीन महीनों में सेंसेक्स ने अच्छी तेजी दिखाई थी। 2019 में सेंसेक्स इस दौरान करीब 7 फीसदी चढ़ा था तो 2014 में यह 19 फीसदी से ज्यादा चढ़ा था।
बजट 2024 में एक्सपर्ट्स की नजरें रेवड़ियों के एलान पर होंगी
एक्सिस पीएमएस के निशित मास्टर ने कहा, "हमें सरकारी की तरफ से पॉलिसी में किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है, क्योंकि यह वोट-ऑन-अकाउंट होगा। इसलिए बजट में होने वाले ऐलान का मार्केट की चाल पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।" एसएएस ऑनलाइन की फाउंडर और सीईओ श्रई जैन ने भी इसी तरह की राय जताई। उन्होंने कहा कि इनवेस्टर्स की नजरें इस बात पर होगी कि वोटर्स को लुभाने के लिए वोट-ऑन-अकाउंट में रेवड़िया बांटी जाती हैं या नहीं।
फिस्कल डेफिसिट और कैपिटल एक्सपेंडिचर के बीच संतुलन
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाने का टारगेट तय किया है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने के दौरान फिस्कल डेफिसिट के टारगेट को ध्यान में रखेगी। अगले वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट इस वित्त वर्ष के 5.9 फीसदी के टारगेट से कम हो सकता है। जेफरीज का कहना है कि अगर सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर में कमी करती है और अगले साल इसका अनुमान 10 लाख करोड़ रुपये से कम रखती है तो मार्केट में करेक्शन आ सकता है। इससे उन कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट आएगी, जो सीधे सरकार के पूंजीगत खर्च से जुड़े हैं।
इन डेटा पर रहेगी स्टॉक मार्केट की नजर
स्टॉक मार्केट अंतरिम बजट में कई चीजों पर नजर रखना चाहेगा। इसमें फिस्कल डेफिसिट, जीडीपी ग्रोथ के अनुमान और सीपीआई इनफ्लेशन शामिल होंगे। मास्टर कैपिटल सर्विसेज के अरविंदर सिंह नंदा ने कहा कि ग्लोबल मार्केट्स के ट्रेंड, घरेलू मार्केट के हालात और क्रूड ऑयल प्राइसेज का असर मार्केट के सेंटिमेंट पर पड़ेगा। रूस-यूक्रेन, चीन-ताइवान, इजराइल-हमास जैसे जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट का असर भी स्टॉक मार्केट्स पर पड़ने की उम्मीद है।