Budget 2024: नए साल में 3 दिन मिलेगी छुट्टी लेकिन घट जाएगी सैलरी! सरकार बजट में करेगी नए नियमों का ऐलान

Budget 2024: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को छठी बार बजट (Union Budget 2024) पेश करेंगी। निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करने वाली है क्योंकि उसके बाद देशभर में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सरकार अपने वोट बैंक को भुनाने खासकर सैलरी क्लास के कई ऐलान कर सकती है

अपडेटेड Dec 16, 2023 पर 4:54 PM
निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करने वाली है क्योंकि उसके बाद देशभर में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।

Budget 2024: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को छठी बार बजट (Union Budget 2024) पेश करेंगी। निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करने वाली है क्योंकि उसके बाद देशभर में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सरकार अपने वोट बैंक को भुनाने खासकर सैलरी क्लास के कई ऐलान कर सकती है। सरकार बजट में लेबर कानूनों को लाने के लेकर घोषणा कर सकती है। सरकार काफी समय से लेबर कानून देशभर में लागू करने का प्लान कर रही है लेकिन राज्यों के बीच आम सहमति नहीं बनने के कारण कानून को लागू करने में देरी हो रही है। हालांकि, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बजट में कोई भी बड़ी घोषणाएं नहीं की जाएगी लेकिन सरकार अपने वोट बैंक के लिए कुछ खास घोषणाएं कर सकती हैं।

क्या है लेबर कोड यानी लेबर कानून?

भारत में 29 सेंट्रल लेबर कानून को 4 कोड में बांटा गया है। कोड के नियमों में वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) और व्यवसाय सुरक्षा (Occupation Safety) और स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति आदि जैसे 4 लेबर कोड हैं। अभी तक 23 राज्यों ने इन ड्राफ्ट कानूनों को तैयार कर लिया है। केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन नियमों को नोटिफाई करना जरूरी है, तभी ये लागू हो पाएंगे।


हफ्ते में 3 दिन रहेगी छुट्टी

लेबर कानून के नियमों के मुताबिक कंपनियों के पास अधिकार होगा कि वह काम के घंटों को बढ़ाकर 12 घंटे कर सकती है लेकिन फिर एक दिन छुट्टी अधिक मिलेगी। तब उस केस में कर्मचारियों को एक या दो दिन नहीं, सीधे 3 दिन की छुट्टी मिलेगी।

सैलरी घटेगी लेकिन बढ़े जाएगा रिटायरमेंट पर मिलने वाला PF

नए नियमों के अनुसार बेसिक सैलरी कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए। इससे ज्यादातर कर्मचारियों की वेतन का स्ट्रक्चर बदल जाएगा। बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी का पैसा ज्यादा पहले से ज्यादा कटेगा। यानी, हाथ आने वाली सैलरी पहले से कम हो सकती है। नौकरी के दौरान पीएफ का ज्यादा पैसा कटने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसा ज्यादा मिलेगा।

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