Budget 2024 : वित्तमंत्री ने 2023 में नई रीजीम में किए थे कई बदलाव, जानिए इनकम टैक्स की नई और पुरानी रीजीम के टैक्स रेट्स

Union Budget 2024 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल बजट में इनकम टैक्स की नई रीजीम में कई बदलाव किए थे। इसका मकसद इसका अट्रैक्शन बढ़ाना था। इनकम टैक्स की नई रीजीम में टैक्स के रेट्स कम हैं, लेकिन डिडक्शन और एग्जेम्प्शन नहीं मिलते हैं

अपडेटेड Jan 27, 2024 पर 4:51 PM
Budget 2024 : इनकम टैक्स की नई रीजीम उन टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद है, जो टैक्स सेविंग्स स्कीम यानी सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश नहीं करते हैं। इसके अलावा उन्होंने कोई होम लोन नहीं लिया है।

Interim Budget 2024 : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने पिछले साल के बजट में इनकम टैक्स की नई रीजीम में कई बदलाव किए थे। इसका मकसद इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाना है। 2020 में शुरुआत के बाद से नई रीजीम में टैक्सपेयर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। टैक्सपेयर्स की ज्यादा दिलचस्पी इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में रही है। सरकार ने 2020 में नई रीजीम का ऐलान करते वक्त कहा था कि टैक्सपेयर्स के लिए नई और पुरानी रीजीम के इस्तेमाल का विकल्प होगा। वह दोनों में से किसी एक का चुनाव कर सकता है। लेकिन, नई रीजीम को टैक्सपेयर्स का ज्यादा रिस्पॉन्स नहीं मिलने की वजह से 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट में वित्तमंत्री ने इसमें कई बदलाव के ऐलान किए थे।

बजट 2023 में नई रीजीम में हुए थे बदलाव

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने नई रीजीम में भी 50,000 रुपये स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा देने का ऐलान किया था। उन्होंने नई रीजीम में 7 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर रिबेट बढ़ा दिया था, जिससे टैक्सपेयर्स की टैक्सलायबिलिटी जीरो हो गई थी। पहले रिबेट के लिए सालाना इनकम की लिमिट 5 लाख रुपये थी। उन्होंने नई रीजीम में बेसिस टैक्स एग्जेम्प्शन की लिमिट 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी थी। सबसे अहम यह कि उन्होंने इनकम टैक्स की नई रीजीम को डिफॉल्ट रीजीम बनाने का ऐलान किया था। सरकार का मानना था कि इन बदलावों से नई रीजीम में टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी।

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पुरानी रीजीम में डिडक्शन और एग्जेम्प्शन

इनकम टैक्स की नई और पुरानी रीजीम के बीच सबसे बड़ा फर्क एग्जेम्प्शन और डिडक्शन के मामले में है। पुरानी रीजीम में कई तरह के डिडक्शन और एग्जेम्प्शन मिलते हैं। इससे टैक्स लायबिलिटी घट जाती है। इनमें सबसे प्रमुख इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80 के तहत मिलने वाला डिडक्शन है। टैक्सपेयर्स सेक्शन 80सी के तहत आने वाले करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसकी लिमिट एक वित्त पर्ष में 1.5 लाख रुपये तय है। दूसरा, पुरानी रीजीम में हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन मिलता है। 60 साल से कम उम्र का टैक्सपेयर खुद और परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी पर एक वित्त वर्ष में 25,000 रुपये डिडक्शन का दावा कर सकते हैं। टैक्सपेयर अगर अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए हेल्थ पॉलिसी खरीदता है तो वह 50,000 रुपये डिडक्शन का दावा कर सकता है।

पुरानी रीजीम में होम लोन पर भी डिडक्शन

पुरानी रीजीम में एक बड़ा फायदा होम लोन के इंटरेस्ट पर मिलने वाला डिडक्शन है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24बी के तहत होम लोन के इंटरेस्ट पर एक वित्त वर्ष में 2 लाख रुपये तक के डिडक्शन का दावा किया जा सकता है। होम लोन के प्रिंसिपल पर भी डिडक्शन की इजाजत है, लेकिन वह सेक्शन 80सी के तहत आता है। चूंकि, सेक्शन 80सी में करीब एक दर्जन इंस्ट्रूमेंट्स शामिल है इसलिए इसका आकर्षण कम हो जाता है। होम लोन के इंटरेस्ट पर मिलने वाले डिडक्शन की वजह से कई टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम का इस्तेमाल करते हैं।

नई रीजीम में टैक्स रेट

नई टैक्स रीजीम में सालाना 3 लाख रुपये पर कोई टैक्स नहीं लगता है। 3,00,001 रुपये से लेकर 6,00,000 रुपये पर 5 फीसदी टैक्स लगता है। 6,00,0001 रुपये से 9,00,000 रुपये इनकम पर 10 फीसदी टैक्स लगता है। 9,00,001 से 12,00,000 रुपये पर 15 फीसदी टैक्स लगता है। 12,00,001 से 15,00,000 रुपये पर 20 फीसदी टैक्स लगता है। 15,00,000 रुपये ज्यादा इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है।

पुरानी रीजीम में टैक्स रेट

इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में सालाना 2.5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं लगता है। 2.5 से 3 लाख रुपये इनकम होने पर टैक्स 5 फीसदी है। 3 लाख से 5 लाख रुपये इनकम पर भी टैक्स 5 फीसदी है। 5 लाख से 10 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स रेट 20 फीसदी है। 10 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर टैक्स रेट 30 फीसदी है।

 नई रीजीम में किसे फायदा

इनकम टैक्स की नई रीजीम में डिडक्शन और एग्जेम्प्शन नहीं मिलते हैं। लेकिन, इसमें टैक्स के रेट कम हैं। यह रीजीम उन टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद है, जो टैक्स सेविंग्स स्कीम यानी सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश नहीं करते हैं। इसके अलावा उन्होंने कोई होम लोन नहीं लिया है।

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