वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट में हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन बढ़ाने के साथ ही प्रीमियम पर जीएसटी में राहत का ऐलान कर सकती हैं। इससे हेल्थ पॉलिसी में आम लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस बारे में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को बताया है। एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि अब हेल्थ पॉलिसी के बगैर प्राइवेट हास्पिटल्स में इलाज कराना मुश्किल हो गया है। इसलिए सरकार को हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी तक आम आदमी की पहुंच बढ़ाने के उपाय करने चाहिए।
अभी हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन के नियम
वित्तमंत्री को हेल्थ पॉलिसी (Health Policy) पर डिडक्शन बढ़ाना चाहिए। पिछले कई सालों से हेल्थ पॉलिसी के डिडक्शन को नहीं बढ़ाया गया है। इस बीच हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम काफी बढ़ा है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी (Section 80D) के तहत हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन मिलता है। कोई व्यक्ति खुद, पत्नी और बच्चों के लिए हेल्थ पॉलिसी खरीदता है तो उसे प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक का डिडक्शन मिलता है। मातापिता के लिए भी हेल्थ पॉलिसी खरीदकर व्यक्ति डिडक्शन का दावा कर सकता है। अगर मातापिता की उम्र 60 से कम है तो प्रीमियम पर सालाना 25,000 रुपये तक का डिडक्शन मिलता है। अगर मातापिता की उम्र 60 साल से ज्यादा है तो प्रीमियम पर सालाना 50,000 रुपये तक डिडक्शन का दावा किया जा सकता है।
डिडक्शन बढ़ाकर दोगुना करने की जरूरत
पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में हेल्थ इंश्योरेंस के बिजनेस हेड सिद्धार्थ सिंघल ने कहा कि हेल्थ पॉलिसी के टैक्स के नियमों में जल्द बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अगर खुद और परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी खरीदता है तो उसे 25,000 रुपये की जगह 50,000 रुपये तक डिडक्शन मिलना चाहिए। इसी तरह अगर वह अपने सीनियर सिटीजंस मातापिता के लिए हेल्थ पॉलिसी खरीदता है तो उसे सालाना 1 लाख रुपये तक का डिडक्शन मिलना चाहिए। इससे हेल्थ पॉलिसी में टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी।
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हेल्थ पॉलिसी पर जीएसटी में कमी
वित्तमंत्री को हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर जीएसटी में भी कमी करने की जरूरत है। अभी हेल्थ पॉलिसी पर जीएसटी 18 फीसदी है। चूंकि हेल्थ प्रीमियम का अमाउंट ज्यादा होता है, जिससे जीएसटी की वजह से कुल प्रीमियम काफी बढ़ जाता है। सरकार हेल्थ पॉलिसी पर जीएसटी का रेट घटा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को हेल्थ पॉलिसी पर जीएसटी का रेट घटाकर 5 फीसदी कर देना चाहिए। इससे हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम घटेगा, जिससे इसे खरीदने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी।