Budget 2024 : वित्त वर्ष 2024-25 का यूनियन बजट (Union Budget 2024) 1 फरवरी को आएगा। यह अंतरिम बजट होगा। इसलिए इस बजट में शामिल डेटा के पूर्ण बजट में ज्यादा बदलने की उम्मीद नहीं है। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में जो नई सरकार बनेगी वह पूर्ण बजट पेश करेगी। वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman ने 8 दिसंबर को कहा था कि अगले वित्त वर्ष का पूर्ण बजट जुलाई में आएगा। बजट तैयार करने के लिए सरकार अगले साल की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान ध्यान में रखती है। नॉमिनल जीडीपी में इनफ्लेशन के असर को शामिल नहीं किया जाता है। उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2023-24 नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू की ग्रोथ 10.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। मुश्किल यह है कि यह वित्त वर्ष सरकार के अनुमान के मुताबिक नहीं दिख रहा।
पहली छमाही में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 8.6 फीसदी
वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही में इंडिया की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 8.6 फीसदी रही। यह अप्रैल-सितंबर 2022 के मुकाबले 22.2 फीसदी कम है। इसलिए कई इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि वित्त वर्ष 2023-24 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10.5 फीसदी से कम रहेगी। कम ग्रोथ के बावूजद अप्रैल-सितंबर में ग्रॉस टैक्स कलेक्शंस 14.7 फीसदी बढ़ा है। FY2022-23 में ग्रॉस टैक्स कलेक्शन 12.7 फीसदी बढ़ा था। सरकार के टैक्स रेवेन्यू की ग्रोथ उतनी नहीं रहती है जितनी जीडीपी की ग्रोथ। लेकिन, दोनों की दिशा एक जैसी होती है।
टैक्स कलेक्शन में जबर्दस्त उछाल
इस वित्त वर्ष में टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ अच्छी रही है। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में वृद्धि में कंप्लायंस का बड़ा हाथ है। उधर, कंपनियों की कमाई बढ़ने का भी योगदान इसमें है। कच्चे माल की कीमतों में गिरावट की वजह से कंपनियों का प्रॉफिट काफी बढ़ा है। RBI के डेटा के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2023 में लिस्टेड नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों का प्रॉफिट करीब पांच गुना यानी 26.2 फीसदी रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 5.3 फीसदी था। इस वजह से कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शंस में अच्छा उछाल देखने को मिला। ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिती नायर का कहना है कि इस वित्त वर्ष में सरकार का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन बजट अनुमान से 85,000 करोड़ रुपये ज्यादा रह सकता है।
नॉमिनल जीडीपी मापने के तरीके को लेकर मसला
नॉमिनल जीडीपी मापने के तरीके को लेकर कुछ मसला रहा है। जुलाई-सितंबर 2023 में जीडीपी ग्रोथ के डेटा आने के बाद चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत सुब्रमण्यम ने कहा था कि टैक्स कलेक्शन में शानदार उछाल को देखने से ऐसा लगता है कि हम इकोनॉमी की रफ्तार और गति की माप उस तरह से नहीं कर रहे हैं, जिस तरह से हमें करना चाहिए। उन्होंने कहा था, "ये रियल डेटा है। ये कैश फ्लो स्टेटमेंट्स हैं, जो कंपनियां पेश करती हैं...इससे ऐसा लगता है कि इकोनॉमी की ग्रोथ जितनी दिख रही है उसके मुकाबले असल ग्रोथ काफी ज्यादा होगी।"