इस साल सरकार का दूसरा बजट 23 जुलाई को आएगा। इससे पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया था। लोकसभा चुनाव वाले साल में सरकार दो बार बजट पेश करती है। पहले अंतरिम बजट आता है। फिर नई सरकार बनने के बाद फुल बजट आता है। फुल बजट से काफी उम्मीदें हैं। सबसे ज्यादा उम्मीद मिडिल क्लास को है। उसका मानना है कि सरकार इस बार इनकम टैक्स में उसे राहत देने के लिए बड़े ऐलान करेगी।
आजादी के बाद पहला बजट 26 नवंबर, 1947 को पेश हुआ था। इसे देश के पहले वित्तमंत्री आरके शणमुखम चेट्टी ने पेश किया था। तब से हर साल सरकार यूनियन बजट पेश करती है। इसमें एक वित्त वर्ष के लिए सरकार के रेवेन्यू का अनुमान और खर्च का प्रस्ताव होता है। अगर आजादी से पहले की बात करें तो पहला बजट 1860 में पेश हुआ था। तब जेम्स विल्सन से इंडिया का बजट पेश किया था। वह अग्रेंज थे। तब इंडिया का बजट सिर्फ अंग्रेजी में प्रिंट होता था। इसे ब्रिटिश शासन की जरूरतों को ध्यान में रख तैयार किया जाता था।
सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड
सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम है। उन्होंने 10 बार यूनियन बजट (Union Budget) पेश किया था। उसके बाद पी चिदंबरम के नाम 9 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 8 बार यूनियन बजट पेश किया था। लेकिन, लगातार सबसे ज्यादा 7 बार यूनियन बजट पेश करने का रिकॉर्ड 23 जुलाई को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के नाम दर्ज हो जाएगा। उन्होंने अपना पहला बजट 2019 में पेश किया था। यह वित्त वर्ष 219-20 का फुल बजट था। उस साल 1 फरवरी को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया था।
सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के नाम पर है। 1 फरवरी, 2020 को उन्होंने दूसरी बार यूनियन बजट (Union Budget) पेश किया था। उनका बजट भाषण दिन में 11 बजे शुरू हुआ था। यह दोपहर 1.40 बजे तक चला था। उन्होंने 2:42 घंटे तक बजट भाषण दिया था। इसके बावजूद उनका बजट भाषण पूरा नहीं हुआ था। तबियत ठीक नहीं होने की वजह से दो पेज पढ़ने को बाकी थे तब उन्होंने अपना भाषण बंद कर दिया था।
बजट पेश होने के समय में बदलाव
1999 से पहले यूनियन बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। तब फरवरी की अंतिम तारीख को यूनियन बजट पेश किया जाता था। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। 1999 में पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने यह परंपरा तोड़ दी थी। तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। सिन्हा ने यूनियन बजट शाम 5 बजे की जगह दिन में 11 बजे पेश करने का प्रस्ताव पेश किया। इस पर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने स्वीकार कर लिया।
बजट पेश होने की तारीख में बदलाव
बजट होने की तारीख भी 2017 में बदल दी गई। तब वित्त मंत्री अरुण जेटली थे। उन्होंने पहली बार 28 फरवरी की जगह 1 फरवरी को बजट पेश किया था। इसे दिन में 11 बजे पेश किया गया था। इस तरह ब्रिटिश शासन काल से चली आ रही एक बड़ी परंपरा पर भी ब्रेक लग गया। जेटली की दलील थी कि अगर बजट 1 फरवरी को पेश किया जाता है तो उस पर चर्चा और उसे पारित कराने के लिए पर्याप्त समय होगा। इस तरह बजट के प्रस्ताव 1 अप्रैल से लागू किया जा सकेगा।