Budget 2024 : यूनियन बजट पेश होने में एक महीने से कम समय बचा है। मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। सबसे ज्यादा उम्मीद इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी को लेकर है। यह सेक्शन टैक्सपेयर्स के बीच काफी लोकप्रिय है। टैक्सपेयर्स का मानना है कि अंतरिम बजट होने के बावजूद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण टैक्सपेयर्स को कुछ राहत दे सकती हैं। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में जो नई सरकार बनेगी वह जुलाई में पूर्ण बजट पेश करेगी। इसमें सरकार बड़े बदलावों का ऐलान करेगी। हालांकि, 2019 के अंतरिम बजट में केंद्रीय पीयूष गोयल ने इनकम टैक्स के मामले में टैक्सपेयर्स को राहत दी थी।
80सी के तहत आते हैं करीब एक दर्जन इंस्ट्रूमेंट्स
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत करीब एक दर्जन इंस्ट्रूमेंट्स आते हैं। इनमें निवेश कर डिडक्शन का दावा किया जा सकता है। हालांकि, यह डिडक्शन इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में उपलब्ध है। इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन का दावा करने की इजाजत नहीं है। 80सी के तहत तहत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, पीपीएफ, सुकन्य समृद्धि योजना सहित कई स्कीम्स आती हैं। दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर डिडक्श की सुविधा भी इसी सेक्शन के तहत मिलती है। टैक्सपेयर्स एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये का निवेश सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में कर डिडक्शन का दावा कर सकते हैं।
एक्सपर्ट्स को सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ने की उम्मीद कम
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शंस की लिमिट बढ़ाए जाने की उम्मीद कम है। इसकी वजह यह है कि यह सुविधा सिर्फ इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में मिलती है। सरकार का फोकस इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने पर है। नई रीजीम में 80सी के फायदे नहीं मिलते हैं। अगर आप इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सेक्शन 80सी का फायदा उठा सकते हैं। इस सेक्शन के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर डिडक्शन का दावा किया जा सकता है। यह निवेश 31 मार्च, 2024 तक किया जा सकता है।
80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लॉक-इन पीरियड
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत PPF, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट, पोस्ट ऑफिस एफडी, म्यूचु्अल फंड्स की टैक्स स्कीम सहित करीब एक दर्जन इंस्ट्रूमेंट्स आते हैं। इसके अलावा दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर डिडक्शन का दावा भी इसी सेक्शन के तहत किया जा सकता है। एक बात याद रखना होगा कि सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लॉक-इन पीरियड होता है। इसका मतलब है कि इनमें निवेश करने के बाद कुछ साल तक आप पैसा नहीं निकाल सकेंगे। सबसे कम 3 साल का लॉक-इन पीरियड म्यूचुअल फंड्स की टैक्स स्कीम में है। इसे इक्टिवी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम भी कहा जाता है। बैंक और पोस्टऑफिस में लॉक-इन पीरियड पांच साल है।