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Budget 2024 poetry: बजट सत्र नहीं हुआ शायराना, निर्मला सीतारमण ने भाषण के दौरान नहीं पेश की कोई कविता

Budget 2024 poetry: Budget सत्र में सिर्फ अर्थव्यवस्था से जुड़ी विकास वाली स्कीमें ही नहीं बताई जाती। कई बार विपक्ष पर निशाना साधते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री मजेदार कविताएं पढ़ते हैं और प्रसिद्ध शायरों की रचनाएं पेश करते हैं। निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट सत्र में किसी भी तरह की शेयरो शायरी नहीं की-

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 01, 2024 पर 12:36 PM
Budget 2024 poetry: बजट सत्र नहीं हुआ शायराना, निर्मला सीतारमण ने भाषण के दौरान नहीं पेश की कोई कविता
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Budget 2024 poetry: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) लंबे बजट भाषणों (Budget 2024 Speech) के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने दशकों के कई रिकॉर्ड तोड़ते हुए लगभग 2 और ढाई घंटों लंबे भाषण दिए हैं। इतने लंबे भाषणों में आंकड़े और डेटा की भरमार रहती है। ऐसे में बजट सत्र को थोड़ा रोमांच से भरने के लिए बीच-बीच में वित्त मंत्री शायराना हो जाते हैं। सिर्फ निर्मला सीतारमण ही नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का नाम भी इस लिस्ट में आता है। खैर बीते वर्ष की भांति इस साल भी सदन में किसी भी तरह की कविता सुनने को नहीं मिली। आइए बजट को डिकोड करने की इस होड़ से एक पल विराम का लीजिए और देखिए मंत्रियों का शायराना अंदाज-

मनमोहन सिंह को सीरियस लेने की ना करें भूल, सदन में शायरियों से बटोरते थे वाहवाही

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को सभी काफी शांत और सौम्य किस्म का इंसान के तौर पर जानते हैं। वो अपनी दूरदर्शिता से लोगों को हमेशा हैरानी में डालते थे। जब डॉ. मनमोहन सिंह देश के वित्त मंत्री थे तो साल 1991-92 में बजट पेश करने के दौरान उन्होंने एक शेर पेश किया। इस शेर के जरिए उन्होंने भारत की ऐतिहासिकता और उसकी किसी भी परिस्थति का डटकर मुकाबला करने की भावना को बताया। कहते हैं कि 'यूनान--मिस्र--रोमा सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी नामोनिशान हमारा।ये मुहम्मद इकबाल की काफी प्रसिद्ध कवितासारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारासे ली गई पंक्तियां हैं।

इसके बाद साल1 992-93 में उन्होंने सदन में फिर शेर पढ़ा - 'तारीखों में ऐसे भी मंजर हमने देखे हैं, कि लम्हों ने खता की थी और सदियों ने सजा पाई।ये शेर प्रसिद्ध शायर मुजफ्फर रज्मी ने लिखा है।

यशवंत सिन्हा भी शेयर के जरिए काफी गहरी बात कह देते हैं

2001 में बजट पेश करने के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने सदन में ये लाइन पढ़ी थी। 'तकाजा है वक्त का की तूफान से जूझो, कहां तक चलोगे किनारे-किनारे।

अरुण जेटली ने बांधा शायरी से समां

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