Daily Voice:बजट का फोकस पीएसयू बैंकों में FPI बढ़ाने के बजाए बैलेंसशीट को मजबूती देने पर होना चाहिए- नवीन चंद्रमोहन

नवीन चंद्रमोहन ने कहा कि सरकार का फोकस इस बात पर होना चाहिए कि सरकारी बैंकों की कार्यक्षमता कैसे सुधरे और उनके बैलेंसशीट में कैसे मजबूती आए.

अपडेटेड Jan 15, 2022 पर 10:34 AM
ITUS Capital के फाउंडर और फंड मैनेजर नवीन चंद्रमोहन ने मनीकंट्रोल के साथ आगामी बजट से जुड़ी उम्मीदों, इकोनॉमी और बाजार से जुड़े मुद्दों पर लंबी बातचीत की

Budget 2022:ITUS Capital के फाउंडर और फंड मैनेजर नवीन चंद्रमोहन ने मनीकंट्रोल के साथ आगामी बजट से जुड़ी उम्मीदों, इकोनॉमी और बाजार से जुड़े मुद्दों पर लंबी बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि आगे हमें जीएसटी की दरें तर्कसंगत होती नजर आ सकते हैं लेकिन इसमें अभी कुछ और समय लग सकता है।

इस तरह की खबरें है कि सरकार सरकारी बैकों में FPI निवेश की लिमिट बढ़ा सकती है। इससे जुड़े सवाल का जबाव देते हुए नवीन चंद्रमोहन ने कहा कि सरकार का फोकस इस बात पर होना चाहिए कि सरकारी बैंकों की कार्यक्षमता कैसे सुधरे और उनके बैलेंसशीट में कैसे मजबूती आए। देश में पीएसयू बैंकों को सपोर्ट देने के लिए पर्याप्त पूंजी है लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि बैंकों के रिटर्न कैपिटल में सुधार होना चाहिए । सरकार का फोकस बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनकी वित्तीय मजबूती पर होना चाहिए ना की उनमें एफपीआई लिमिट बढ़ाने पर।

दिसंबर तिमाही में आईटी कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़े सवाल का जबाव देते हुए नवीन चंद्रमोहन ने कहा कि आईटी और टेक कंपनियों में पिछले 2 साल से ज्यादा की अवधि से हमारा काफी बड़ा एक्सपोजर है। आईटी कंपनियों के दिसंबर तिमाही के आंकड़े दुनियाभर के बॉर्डर ट्रेन्ड का ही रिफलेक्शन हैं। दुनियाभर की तमाम इंडस्ट्री डिजिटलीकरण पर फोकस कर रही हैं। आगे भी यह ट्रेन्ड कायम रहेगा। क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में टेक्नोलॉजी किसी भी कारोबार का बहुत अहम हिस्सा बन गई है। दिसंबर तिमाही के आंकड़ें हमारी इसी राय की पुष्टि करते हैं।


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आगामी यूनियन बजट पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि यह बात साफ है कि हर बार की तरह सरकार का फोकस सार्वजनिक क्षेत्र के लिए होने वाले निवेशक को बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने,सड़को को विस्तार देनें और भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर होगा। इसके अलावा अगर रियल एस्टेट की मांग को बढ़ाने, जीएसटी के मानकीकरण और रुलर ग्रोथ को बढ़ाने के लिए कोई प्रावधान किए जाते है तों यह सोने पर सुहागा होगा।

बाजार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब बाजार की नजर कंपनियों के नतीजों पर रहेगी। इस समय हम सभी सेक्टरों की ग्रोथ रिकवरी साइकिल के शुरुआती दौर में है। आगे हमको कंपनियों के प्रदर्शन पर बाजार का रिएक्शन आता दिखेगा। हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2022 में अच्छी बैलेंसशीट और अच्छे फंडामेंटल वाली कंपनियां अच्छा रिटर्न देती नजर आएंगी।

गौरतलब है कि दिसंबर महीने में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में जबरदस्त निवेश आता दिखा है। इस अवधि में म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों में 24990 करोड़ रुपये आते दिखे हैं जबकि एसआईपी के जरिए 11305 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इससे जुडे सवाल का जवाब देते हुए नवीन चंद्रमोहन ने कहा कि उम्मीद है कि डोमेस्टिक फंडों में इस तरह का फ्लो आगे भी कायम रहेगा। हालांकि महीने दर महीने आधार पर उतार-चढ़ाव हो सकता है लेकिन ब्रॉडर ट्रेंड पॉजिटीव ही रहेगा।

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