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Union Budget 2023: यह बजट इंडियन टैक्स सिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बड़ा मौका है

Union Budget 2023: पिछले कुछ सालों में टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाने की कोशिश की है, जिसके अच्छे नतीजें सामने आएं हैं। यूनियन बजट 2023 इनकम टैक्स में बड़ा बदलाव करने का मौका हो सकता है

TV Mohandas Paiअपडेटेड Jan 10, 2023 पर 6:45 PM
Union Budget 2023: यह बजट इंडियन टैक्स सिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बड़ा मौका है
टैक्स सिस्टम में बदलाव से इसका स्ट्रक्चर आसान होगा। डोनेशन के लिए सेक्शन 80जी और हेल्थ इंश्योरेंस के लिए सेक्शन 80डी को छोड़ बाकी सभी एक्जेम्प्शंस वापस लेने की जरूरत है। इससे उन लोगों के लिए एक विकल्प मिलेगा, जो टैक्स फाइलिंग की आसान व्यवस्था चाहते हैं।

Union Budget 2023: अगला यूनियन बजट (Budget 2023) 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले आखिरी पूर्ण बजट हो सकता है। यह NDA सरकार का 10वां बजट होगा। यह देश के आर्थिक इतिहास में एक अहम मोड़ भी होगा। दुनिया के आर्थिक आसमान पर भारत एक चमकता सितारा है। खासकर बड़ी इकोनॉमीज में इंडिया का ग्रोथ रेट सबसे ज्यादा है। आज भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि पर्चेंजिंग पावर पैरिटी में यह तीसरे पायदान पर है।

इंडियन इकोनॉमी ने कोरोना के असर के बाद तेज रिकवरी दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में नॉमिनल जीडीपी 273 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में रियल टर्म में इकोनॉमी की ग्रोथ 6-7 फीसदी रह सकती है। इसका मतलब है कि जीडीपी में करीब 32 लाख करोड़ रुपये वृद्धि होगी। यह काफी बड़ा अमाउंट है।

फिस्कल डेफिसिट को 6.4 फीसदी से घटाकर करीब 6 फीसदी पर लाने के संकल्प को बजट 2023 में दिखाना होगा। टैक्स रेवेन्यू बहुत अच्छा रहा है। इसके इस फाइनेंशियल ईयर में 28 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान को पार कर जाने की उम्मीद है। यह 32-33 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में भी टैक्स रेवेन्यू अच्छा था। उस दौरान रेवेन्यू बजट अनुमान से 5 लाख करोड़ रुपये ज्यादा रहा। फाइनेंशियर ईयर 2023-24 में टैक्स रेवेन्यू बढ़कर 37-38 लाख करोड़ रुपये रह सकता है।

अभी खर्च का जो ट्रेंड है, उसमें सब्सिडी की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा है। इसके 6 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। इसमें फूड एंड फर्टिलाइजर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। फूड सब्सिडी करीब 3 लाख करोड़ रुपये, जबकि फर्टिलाइजर सब्सिडी 2.5 लाख करोड़ रहने की उम्मीद है। डेटा से संकेत मिलता है कि इस फाइनेंशियल ईयर में बजट अनुमान से ज्यादा रहेगी। हालांकि, दुनियाभर में फर्टिलाइजहर और गैस की कीमतों में हाल में आई गिरावट और फूड सब्सिडी की नई पॉलिसी से अगले फाइनेंशियल ईयर में कुल सब्सिडी 2 लाख करोड़ रुपये तक घट सकती है।

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