Union Budget 2023: एक्सपोर्ट ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने से स्टील इंडस्ट्री में आएगी मजबूती

Union Budget 2023: आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से स्टील की भी मांग बढ़ने की उम्मीद है। कंस्ट्रक्शन खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन में स्टील का काफी इस्तेमाल होता है। बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में तो स्टील का इस्तेमाल 60 फीसदी तक होता है। इसलिए इस सेक्टर के लिए बजट में बड़े ऐलान की उम्मीद है

अपडेटेड Jan 07, 2023 पर 5:58 PM
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नेशनल स्टील पॉलिसी 2017 के मुताबिक, स्टील इंडस्ट्री में सीधे तौर पर 5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है, जबकि परोक्ष रूप से रोजगार के लिए करीब 20 लाख लोग इस इंडस्ट्री पर निर्भर हैं।

सतीश कुमार अग्रवाल

Union Budget 2023: इंडिया खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर की ग्रोथ में स्टील इंडस्ट्री का बड़ा हाथ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 तक इंडियन इकोनॉमी के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर के टारगेट को लेकर स्टील इंडस्ट्री बहुत उत्साहित है। पिछले 2-3 साल में कोरोना की महामारी का असर स्टील इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। इंडिया की जीडीपी में स्टील इंडस्ट्री की करीब 2 फीसदी हिस्सेदारी है। इकोनॉमी के कई सेक्टर में स्टील के इस्तेमाल को देखते हुए इसे आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की पहली कड़ी माना जाता है। नेशनल स्टील पॉलिसी 2017 के मुताबिक, स्टील इंडस्ट्री में सीधे तौर पर 5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है, जबकि परोक्ष रूप से रोजगार के लिए करीब 20 लाख लोग इस इंडस्ट्री पर निर्भर हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस का लाभ


नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन की वजह से स्टील की मांग काफी बढ़ने की उम्मीद है। इसमें हाउसिंग फॉर ऑल, स्मार्ट सिटीज, भारतमाला, सागरमाला, उड़ान, फ्रेट कॉरिडोर्स, हाई स्पीड रेल सहित कई बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इससे साल 2025 तक स्टील की मांग की CAGR 7 से 7.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। ब्लिडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन में स्टील की हिस्सेदारी 60 से 65 फीसदी तक होती है।

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PLI स्कीम का फायदा

PLI स्कीम का फायदा इंटिग्रेटेड स्टील मैन्युफैक्चरर्स के साथ ही डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग करने वाले MSMEs को मिला है। इससे इंडिया स्टील बनाने वाले बड़े देशों दक्षिण कोरिया और जापान की बराबरी में आ गया है। अब स्टील कंपनियां एक्सपोर्ट के लिए स्टील बना रही हैं। PLI स्कीम की वजह से स्टील सेक्टर में देशी और विदेशी निवेश की सभावना बढ़ी है।

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RoDTEP में स्टील को शामिल किया जाए

अभी स्टील RoDTEP स्कीम से बाहर है। इस स्कीम के तहत ऑटोमोबाइल और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स के निर्यातकों को होने वाली सप्लाई पर एम्बेडेड टैक्सेज में रिफंड मिलता है। हाल में ट्रेड मिनिस्ट्री ने एक एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम का दायरा बढ़ाते हुए घरेलू स्टील उत्पादकों के लिए लोकल लेवी रीइंबर्स करने की इजाजत दी है। यह स्टील इंडस्ट्री के लिए स्वागतयोग्य कदम है। इंडियन स्टील इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिए सप्लाई चेन और फाइनेंसिंग कॉस्ट में कमी लाने की जरूरत है।

एक्सपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग

स्टील इंडस्ट्री को उम्मीद है कि इस साल की शुरुआत में लगाई गई एक्सपोर्ट ड्यूटी को सरकार हटाएगी। रूस-यूक्रेन लड़ाई की वजह से इंडियन स्टील मैन्युफैक्चरर्स के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे खुले हैं। अगल यूनियन बजट 2023 मे एक्सपोर्ट ड्यूटी में संशोधन किया जाता है तो इससे स्टील इंडस्ट्री को फायदा होगा।

(लेखक कामधेनु के चेयमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर हैं)

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