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Budget 2023: खास सेक्टर को मदद के साथ ही फिस्कल कंसॉलिडेशन पर फोकस बढ़ाने की जरूरत, राधिका पांडेय की सलाह

Union Budget 2023: सरकार के सामने अभी कैपिटल एक्सपेंडिचर, खास सेक्टरों की मदद और फिस्कल कंसॉलिडेशन के बीच बैलेंस बनाने की चुनौती है। हालांकि, ग्लोबल इकोनॉमी की स्थिति को देखते हुए मीडियम टर्म में इंडिया की 6-7 फीसदी की ग्रोथ अच्छी कही जाएगी

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Dec 27, 2022 पर 1:36 PM
Budget 2023: खास सेक्टर को मदद के साथ ही फिस्कल कंसॉलिडेशन पर फोकस बढ़ाने की जरूरत, राधिका पांडेय की सलाह
राधिका पांडे ने कहा कि सरकार को फिस्कल डेफिसिट घटाने पर फोकस करना होगा। उसे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी पर लाने की जरूरत है।

Union Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को कुछ सेक्टर के लिए मदद के उपाय करने के साथ ही फिस्कल कंसॉलिडेशन पर फोकस बढ़ाने की जरूरत है। National Institute of Public Finance and Policy (NIPFP) की सीनियर फेलो राधिका पांडे ने यह बात कही है। NIPFP एक स्वायत रिसर्च इंस्टीट्यूट है, जो फाइनेंस मिनिस्ट्री के तहत आता है। पांडे ने कहा कि सरकार को बजट में उन सेक्टर की मदद के लिए उपाय करने की जरूरत है, जो मुश्किल का सामना कर रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट (Budget 2023) पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब सरकार को इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले उपाय करने के साथ ही अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने का दबाव है। कोरोना की महामारी के दौरान इकोनॉमी को सहारा देने के लिए सरकार ने अपना खर्च बढ़ाया था। इससे इसका फिस्कल डेफिसिट काफी बढ़ गया है।

मीडियम टर्म में फिस्कल डेफिसिट 4.5 फीसदी पर लाने की जरूरत

पांडे ने कहा कि सरकार के सामने कुछ सेक्टर्स की मदद करने, कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने और फिस्कल कंसॉलिडेशन पर फोकस करने की चुनौती है। सरकार को फिस्कल डेफिसिट घटाने की जरूरत है। उसे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी पर लाने की जरूरत है। ग्लोबल इकोनॉमी मुश्किल में दिख रही है। ऐसे में मीडियम टर्म में इंडिया की 6-7 फीसदी की इकोनॉमिक ग्रोथ अच्छी कही जाएगी।

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