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Union Budget 2023: लो इंटरेस्ट रेट और कम उधार लेने से बढ़ेगा पूंजीगत खर्च

Union Budget 2023: सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए पूंजीगत खर्च का 7.5 लाख करोड़ रुपये का टारगेट रखा है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में भी सरकार के लिए पूंजीगत खर्च पर फोकस बनाए रखने में दिक्कत आ सकती है

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Dec 22, 2022 पर 12:59 PM
Union Budget 2023: लो इंटरेस्ट रेट और कम उधार लेने से बढ़ेगा पूंजीगत खर्च
पिछले हफ्ते चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेशवरन ने कहा था कि सरकार के लिए पूंजीगत खर्च की मौजूदा रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल होगा।

Union Budget 2023: अगले यूनियन बजट से पहले सरकार के पूंजीगत खर्च को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि देश और दुनिया की इकोनॉमी को देखते हुए सरकार को पूंजीगत खर्च पर अपना फोकस बढ़ाए रखना चाहिए। उधर, कुछ इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि सरकार के लिए अगले फाइनेंशियल ईयर में ज्यादा खर्च करना मुमकिन नहीं होगा। इस बीच, प्रमुख उद्योग चैंबर ASSOCHAM के प्रेसिडेंट सुमंत सिन्हा ने CNBC-TV18 से कहा है कि अगर सरकार पूंजीगत खर्च पर फोकस बनाए रखना चाहती है तो उसे मार्केट से कम उधार लेने के साथ ही इंटरेस्ट रेट कम रखना होगा। JK Paper के मैनेजिंग डायरेक्टर हर्षपति सिंघानिया का मानना है कि अगले यूनियन बजट (Budget 2023) का फोकस ग्रोथ पर होगा।

सोलर मैन्युफैक्चरिंग सहित कुछ सेक्टर पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत

सिन्हा ने बताया कि इंटरेस्ट रेट कम रहने और सरकार के कम कर्ज लेने से पूंजीगत खर्च जारी रखना मुमकिन होगा। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि सरकार ने कई सेक्टर के लिए PLI स्कीम की शुरुआत कर बहुत अच्छा कदम उठाया है। लेकिन, कुछ ऐसे सेक्टर हैं, जिन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। सिर्फ PLI से काम नहीं चलेगा। सोलर मैन्युफैक्चरिंग इसका एक उदाहरण है। इसलिए सरकार को कुछ खास सेक्टरों के लिए पीएलआई बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। दरअसल, इंडिया के पास सप्लाई के मामले में चीन का विकल्प बनने का शानदार मौका है।"

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