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Union Budget 2023: फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 5.9% रह सकता है, महेंद्र कुमार जाजू का अनुमान

Union Budget 2023: महेंद्र कुमार जाजू का मानना है कि सरकार ग्रामीण इलाकों से जुड़ी सरकारी स्कीमों के लिए आवंटन बढ़ा सकती है। इसकी वजह यह है कि कोरोना की महामारी के बाद शहरों इलाकों में तो मांग में मजबूती आई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह अब भी कमजोर बनी हुई है

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jan 10, 2023 पर 6:25 PM
Union Budget 2023: फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 5.9% रह सकता है, महेंद्र कुमार जाजू का अनुमान
जाजू ने कहा कि बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन के उपायों पर भी नजरें होंगी। अगर फिस्कल डेफिसिट का अनुमान 5.9 फीसदी से ज्यादा रहता है तो इसके चलते बॉन्ड यील्ड पर दबाव दिख सकता है।

Union Budget 2023: अगले यूनियन बजट (Budget 2023) में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 5.8-5.9 रह सकता है। यह फिस्कल डेफिसिट में कमी लाने के सरकार के संकल्प को दिखाएगा। सरकार फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाना चाहती है। मिराए एसेट्स म्यूचुअल फंड के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (फिक्स्ड इनकम) महेंद्र कुमार जाजू ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकारी सिक्योरिटीज की ज्यादा सप्लाई अगले बजट की मुख्य थीम होगी। सरकार की कुल उधारी 16.5-17 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने अगले बजट को लेकर विस्तार से चर्चा की। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी।

इकोनॉमिक ग्रोथ पर बना रहेगा फोकस

जाजू ने कहा कि अगले फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 5.8-5.9 फीसदी रह सकता है। बजट में सरकार का फोकस इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) पर बने रहने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि इनफ्लेशन को लेकर चिंता घट रही है। सरकार को पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर अपना फोकस बनाए रखना चाहिए। प्राइवेट इनवेस्टमेंट अब भी कमजोर बना हुआ है। पिछले दो बजटों में सरकार ने पूंजीगत खर्च काफी बढ़ाया है। उम्मीद है कि अगले यूनियन बजट में भी पूंजीगत खर्च के आवंटन में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है।

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