UNION BUDGET 2022: जानिए इकोनॉमी की मजबूती पर बजट में कितना रहेगा फोकस

ऐसा लगता है कि इस बार के बजट (Budget 2022) में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) रोजकोषीय घाटे को कम करने पर फोकस नहीं करेंगी। वह राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) में कमी के लिए कुछ कदम उठा सकती हैं, लेकिन इस पर ज्यादा फोकस नहीं होगा

अपडेटेड Jan 21, 2022 पर 5:04 PM
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वित्त मंत्री के लिए तेज ग्रोथ को बनाए रखना बड़ा चैलेंज है। इसलिए इकोनॉमी की मजबूती पर उनका फोकस थोड़ा कम रह सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट (Budget 2022) पेश करेंगी।

साल 2020 में बजट (Budget) पेश होने के बाद कोरोना की महामारी ने देश में पांव पसारा था। महामारी से निपटने की सरकार को कोशिशों के चलते कई बजट प्रस्तावों पर फोकस कम हो गया था। फिर, 2021 में पेश बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इकोनॉमिक ग्रोथ तेज करने के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर जोर दिया था। इस बार भी हालात बहुत ज्यादा अलग नहीं हैं। वित्त मंत्री के लिए तेज ग्रोथ अब भी चुनौती है। ऐसे में इकोनॉमी की मजबूती पर फोकस थोड़ा कम रहने की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट (Budget 2022) पेश करेंगी।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, "आने वाले बजट में ग्रोथ बढ़ाने के उपायों और अर्थव्यवस्था की मजबूती के कदमों के बीच संतुलन दिखाई देगा।" कोरोना से निपटने के लिए ज्यादा खर्च और वित्तीय सेहत सुधारने पर फोकस के चलते वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit) बढ़कर जीडीपी के 9.2 फीसदी पर पहुंच गया था। इसके चलते सरकार ने अगले साल राजकोषीय घाटे को कम कर 6.8 फीसदी पर लाने का लक्ष्य तय किया था।

ऐसा लगता है कि इस बार के बजट में वित्त मंत्री रोजकोषीय घाटे को कम करने पर बहुत ज्यादा जोर नहीं देंगी। हालांकि, वह राजकोषीय घाटे में कमी के लिए कुछ कदम उठा सकती हैं, लेकिन इस पर ज्यादा फोकस नहीं होगा। मनीकंट्रोल के सर्वे में शामिल 10 अर्थशास्त्रियों की आम राय थी कि वित्त मंत्री अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 6.1 फीसदी रख सकती हैं।


मॉर्गन स्टेनली के इकोनॉमिस्ट्स ने 18 जनवरी को अपनी रिपोर्ट में कहा, "हमारा मानना है कि सरकार धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था की हालत सुधारना चाहेगी। यह टैक्स कलेक्शन में वृद्धि जारी रहने और कोरोना से जुड़े खर्च में कमी पर निर्भर करेगा।" कम बेस इफेक्ट के चलते वित्त वर्ष 2021-22 में घरेलू अर्थव्यवस्था की जीडीपी ग्रोथ 9.2 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2022-23 में ग्रोथ घटकर 7.6 फीसदी रह सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रोफेनल फोरकास्टर्स सर्वे में यह अनुमान जताया गया है।

वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान केंद्र सरकार के टैक्स कलेक्शन में अच्छा सुधार देखने को मिला है। लो बेस इफेक्ट और इकोनॉमिक रिकवरी जारी रहने से पिछले साल अप्रैल-नवंबर के दौरान ग्रॉस टैक्स कलेक्शन में साल दर साल आधार पर 50.3 फीसदी उछाल आया। इस वित्त वर्ष में केंद्र को मिलने वाली रकम बजट अनुमान के मुकाबले 3 लाख करोड़ रुपये ज्यादा रह सकती है।

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