कोरोना की मार जिन सेक्टर पर सबसे ज्यादा पड़ी थी, उनमें रियल एस्टेट (Real Estate Sector) शामिल था। हालांकि, धीरे-धीरे इस सेक्टर में हालात सुधर रहे हैं, लेकिन इसे सरकार की बड़ी मदद की जरूरत है। देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में से एक हीरानंदानी ग्रुप के एमडी निरंजन हीरानंदानी का मानना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) बजट में इस सेक्टर के लिए कई बड़े ऐलान कर सकती हैं। इससे करोड़ों लोगों को रोजगार देने वाले इस सेक्टर की हालत सुधरेगी। साथ ही घर खरीदारों को भी फायदा होगा। आइए जानते हैं हीरानंदानी वित्तमंत्री से रियल एस्टेट सेक्टर के लिए क्या-क्या चाहते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी।
निरंजन हीरानंदानी का मानना है कि वित्त मंत्री को इस बार बजट में होम लोन इंट्रेस्ट (Home Loan Interest) पर डिडक्शन को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर देना चाहिए। रियल एस्टेट स्ट्रेस फंड (Real Estate Stress Fund) को बढ़ाकर 1,25,000 करोड़ रुपये कर देना चाहिए। साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा मिलना चाहिए। इससे इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाने में तो मदद मिलेगी ही, साथ ही रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।
उन्होंने मनीकंट्रोल को बताया कि रियल एस्टेट में हालात सुधरता है तो इसका फायदा इससे जुड़े 270 इंडस्ट्रीज को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मेट्रो शहरों में एफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable Housing) के लिए 45 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाएंगी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी हाउसिंग स्कीम 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) की डेलाइन भी बढ़ाकर मार्च 2023 तक की जानी चाहिए। इससे घर खरीदने की चाहत रखने वाले आम आदमी को बहुत फायदा होगा।
हीरानंदानी नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NARDECO) के वाइस चेयरमैन भी हैं। उन्होंने कहा कि हाउस प्रॉपर्टी बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स को 10 फीसदी करना चाहिए। रियल एस्टेट कंपनियों को भी एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के जरिए कर्ज जुटाने की इजाजत मिलनी चाहिए। इससे उन्हें सस्ता कर्ज जुटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि घरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भी बजट में उपाय होने चाहिए। वित्त मंत्री रेंटल हाउसिंग पर स्टैंडर्ड डिडक्शन को 30 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी कर सकती हैं। इससे मकान मालिक अपने खाली घर को किराया पर देने के लिए आगे आएंगे।
एफोर्डेबल हाउसिंग के लिए अभी 45 लाख रुपये की सीमा तय है। इसका मतलब है कि 45 लाख रुपये मूल्य तक के घर ही एफोर्डेबल हाउसिंग के तहत आते हैं। हीरानंदानी का मानना है कि सरकार को मेट्रो शहरों में इसे बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर देना चाहिए। घर खरीदारों को अगर सरकार स्टैंप ड्यूटी में रियायत देती है तो इससे घरों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी।